गुड़ के 8 फायदे और सफ़ेद शक्कर के नुकसान | 8 benefits of jaggery and disadvantages of white sugar

सफेद शक्कर के विकल्प

मित्रों सफ़ेद शकार देखने में कितना अच्छा लगता है, लेकिन कहा गया है न कि जरूरी नहीं की जो देखने में अच्छा लगता है उसके गुण और स्वभाव भी अच्छे हों। तो आइये जानते हैं कि सफ़ेद शक्कर के नुकसान क्या हैं और इसकी जगह इसके और क्या क्या विकल्प सकते हैं।

सफेद शक्कर एसिडिक प्रभाव छोड़ती है, और अत्यधिक कैलोरी देती है। शारीरिक गतिविधियां घटाने के साथ-साथ शक्कर का निरंतर सेवन इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता को कम करता है. पेट का मोटापा व फैट का जमाव बढ़ाता है, फैटी लिवर, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, हृदय रोग व टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को भी बढ़ाता है। अत: विश्व भर में इसके कुछ विकल्प ढूंढे गए हैं।  

गुड़ (जेगरी)  

गुड़ (जेगरी) एक प्राकृतिक स्वीटनर है जो गन्ने के रस से तैयार किया जाता है। यह ठोस, तरल व पाउडर के रूप में मिलता है। गज्जे से गुड़ बनाने के लिए एक अलग तरह की विधि का उपयोग किया जाता है।

गुड़ में जो माइक्रोन्यूट्रीएंट्स होते हैं, उनमें कई पौष्टिक व औषधीय गुण होते हैं जैसे कैंसररोधी व एंटीटॉक्सिक गुणा कई वैज्ञानिक शोधों में गुड़ को व्हाइट शुगर (सफेद शक्कर) से अच्छ सिद्ध किया गया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि गुड़ शरीर में गर्मी उत्पन्न करता है और शरीर को  तुरन्त ऊर्जा देता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि वह दिन दूर नहीं जब गुड़ सफेद शक्कर की  तुलना में बड़ी क्रांति पैदा करेगा।

यह माना जाता है कि गुड़ में आयरन की अच्छी मात्रा होती है जो एनिमिया से बचाव में मदद करती है। गुड़ में कुछ मात्रा में मिनरल्स भी होते हैं जो शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। गुड़ शरीर की अंदरूनी सफाई के लिए भी बहुत अच्छा है। यह श्वसन नली, आहार नाली, फेफड़ों, पेट व आंतों की सफाई करता है। 

गुड़ व शक्कर की तुलना-

1. गन्ने के रस से शक्कर बजाने के लिए केमिकल प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है जबकि गुड को तैयार करने के लिए प्राकृतिक विधि अपनाई जाती है। गुड़ बनाने के लिए गन्ने के रस को लगातार तब तक उबाला जाता है जब तक वह पेस्ट के रूप में तैयार न होजाए।

2. शक्कर केवल सुक्रोज की बनी होती है जबकि गुड़ सुक्रोज, मिनरल्स, आयरज व कुछ फायबर का बना होता है।  

3. शक्कर सुक्रोज का बहुत ही सरल रूप होती है, अतः यह तुरंत रक्त में अवशोषित हो जाती है। शक्कर एक ही बार में पूरी ऊर्जा दे देती है। यह रक्त शर्करा के स्तर को  बहुत तेजी से बढ़ाती है जो हानिकारक हो सकता है। गुड़ में सुकोज़ की एक जटिल व लंबी श्रृंखला होती है जिसके कारण इसका पाचन धीरे-धीरे होता है। यह धीरेव देर तक ऊजा देता है और शरीर के लिएयह हानिकारक नहीं होता है।

4. सफेद शक्कर का pH0.1 होता है जो इसे एसिडिक बना देता है, जबकि गुड़ पोटेशियम से समृद्ध होता है और शरीर में एसिड के जमाव को कम कर एसिड का संतुलन बनाए रखता है।

गुड़ के फायदे-

• मिनरल्स का समृद्ध स्रोत

• पचाने में आसान

• मिठास का अनोखा स्वाद

• गले व फेफड़ों के रोगों के इलाज में फायदेमंद

• आसानी से घुलता है व शरीर में शक्कर की कमी को नियंत्रित करता है

• सल्फर रहित होने के कारण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं होता

• धूल-मिट्टी से होने वाली एलर्जी से बचाव करता है  सर्दी-जुकाम, अस्थमा में फायदेमंद व सुरक्षित

• शरीर को ऐल्कलाइन बनाए रखता है  

खांडसारी शक्कर

मिश्री

खांडसारी शक्कर या रॉ शुगर रिफाइंड शुगर (सफेद शक्कर) से बेहतर होती है। खांडसारी शक्कर के हर ग्राम में रिफाइंड शुगर (सफेद शक्कर) से कम कैलोरी होती है। इस शक्कर को बनाने में एक अलग प्रक्रिया इस्तेमाल की जाती है। रिफाइंड शुगर (सफेद शक्कर) की तुलना में खांडसारी शक्कर में न्यूट्रिएंट्स की मात्रा अधिक होती है। इसमें कैल्शियम, मिनरल्स, आदि पोषक तत्व होते हैं जो इसे रिफाइंड शुगर (सफेद शक्कर) से अधिक उपयोगी बनाते हैं। खांडसारी शक्कर का उपयोग शरीर के pH को ऐल्कलाइन रखता है जबकि रिफाइंड या सफेद शक्कर एसिडिक होती है व शरीर के लिए हानिकारक है।

अगेव

सफेद शक्कर के विकल्प के रूप में अगेव का उपयोग बहुत प्रचलित है अगेव 90% फ्रुक्टोज़ से समृद्ध एक प्राकृतिक स्वीटनर है जो शक्कर से करीब डेढ़ गुना मीठा होता है लेकिन शक्कर से होने वाले दुष्प्रभावों से मुक्त डोता है। अगेव का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (ब्लड शुगर बढ़ाने की क्षमता) 11 होती है जो सफेद शक्कर (68 ग्लायसेमिक इंडेक्स) की तुलना में बहुत कम है, इसलिए अगेव का उपयोग रक्त शर्करा का स्तर नहीं बढ़ाता है। अगेव की 100 ग्राम की मात्रा में कई विटामिन्स जैसे B1, B2, B3, B6, B9, विटामिन C और कई मिनरल्स जैसे कैल्शियम, आयरन, फॉस्फोरस और जिंक भी सूक्ष्म मात्रा में पाए जाते हैं। वैसे तो अगेव शक्कर का एक अच्छा व काफी प्रचलित विकल्प है लेकिन इसका प्रयोग सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए क्योंकि ज्यादा मात्रा में इसका उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। 

स्टीविया

स्टीविया प्रकृति द्वारा प्रदत्त जीरो कैलोरी स्वीटनर है। स्टीविया रेबायुडाइऐना बरटोनी नामक पौधे के पत्तों से प्राप्त होता है। इसकी पत्तियों में स्टीवाओल  ग्लाइकोसाइड्स होते हैं जो इसे मिठास प्रदान करते हैं। वैज्ञानिक शोधों में पाया गया है कि स्टीविया शक्कर से करीब 300 गुना अधिक मीठा होता है लेकिन इसमें शक्कर के समान कोई कैलोरी नहीं होती। करीब 200 वर्षों से इसका उपयोग एक सुरक्षित स्वीटनर के रूप में होता आ रहा है। यह शक्कर का एक बहुत ही अच्छा विकल्प है और कम कैलोरी वाली डाइट लेने वालों या स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक आदर्श स्वीटनर है। स्टीविया का उपयोग रक्त शर्करा का स्तर नहीं बढ़ाता इसलिए यह डायबिटिक लोगों के लिए भी सुरक्षित है। स्टीविया WHO द्वारा प्रमाणित है और इसके उपयोग के कोई भी दुष्प्रभाव नहीं हैं। 

इस प्रकार हम रिफाइंड सफेद शक्कर व एसिडिक आहार के स्थान पर प्राकृतिक ऐल्कलाइन आहार अपनाकर स्वस्थ रह सकते हैं व कई रोगों से अपना बचाव कर सकते हैं।

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