The Role Of Nutrition in Hormone Imbalance / हॉर्मोन असंतुलन में न्यूट्रीशन की भूमिका

हॉर्मोन असंतुलन

हॉर्मोन्स आम तौर पर रसायन होते हैं जो हमारे शरीर की अंत: स्रावी ग्रंथियों (एगाडोक्राइन ग्लेंड्स) में बलते हैं और रक्त के माध्यम से टिश्यू और विभिन्न अंगों में पहुंचते हैं। ये हॉर्मोन्स विभिन्न शारीरिक प्रक्रियाओं को संवालित व नियंत्रित करते हैं। इसलिए हॉर्मोन असंतुलन की समस्या होजे पर पूरे शरीर पर इसका प्रभाव पड़ता है। हॉर्मोन्स का स्तर सही न होजे पर बाल झड़ना, माइग्रेन, त्वचा की बीमारियां, मुंहासे, थकान, वजन बढ़ना, डिप्रेशन  जैसी अनेक समस्याएं हो जाती हैं।

हॉर्मोन्स के इस असंतुलन को ठीक करने में न्यूट्रीशन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमारा आहार हॉर्मोन्स के उत्पादन व स्त्राव को सीधा प्रभावित करता है। हॉर्मोन्स का संतुलन बनाए रखने के लिए न सिर्फ आहार की संरचना महत्वपूर्ण है बल्कि उसकी मात्रा व लेने का समय भी निर्णायक होता है। हमारे दैनिक आहार में कुछ ऐसे पोषक तत्व ज़रूर शामिल होने चाहिए जो हॉर्मोन्स के बिगड़े हुए संतुलन को ठीक कर सकें। कुछ ऐसे ही तत्वों के बारे में जानकारियां निम्न हैं 

प्रोटीनप्रोटीज हमारे शरीर के बिल्डिंग ब्लॉक्स होते हैं और हॉर्मोन्स के कार्य करने के लिए सरंचनात्मक बुनियाद तैयार करते हैं। प्रोटीन टिश्यू की मरम्मत भी करते हैं। दालें, मटर, पालक, सोयाबीन, राजमा, अंकुरित अनाज, ओट्स, आदि प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं।

विटामिन्स विटामिन्स ते न्यूट्रीटस होते हैं जो हॉर्मोन्स के उत्पादन व संतुलन को बनाए रखते हैं। तूंकि विटामिन्स हॉर्मोन्स के बेहतर कार्य करने के लिए जरूरी होते हैं इसलिए आहार में इनका होना बहुत ज़रूरी है। कुछ विटामिन्स जो हॉर्मोन्स का संतुलन कायम रखते हैं, वे निम्न हैं- 

विटामिन B6यह विटामिन पानी में घुलनशील होता है और फलियों, दालों, आदि में पाया जाता है। यह विटामिन नर्वस सिस्टम को नियंत्रित करता है और एस्ट्रोजन व टेस्टोस्टेरोज जैसे हॉर्मोन्स की क्रियाशीलता के लिए ज़रूरी है।
विटामिन B12शरीर के गेटाबॉलिज्म के लिए विटामिन B12 बहुत ज़रूरी तत्व है। यह विटामिन लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण के लिए आवश्यक है, ब्रेन की क्रियाशीलता बढ़ाता है और शरीर के ऊर्जा स्तर में वृद्धि करता है। हॉर्मोन्स के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए विटामिन B12 बहुत आवश्यक है। शाकाहारी आहार में विटामिन B12 कम ही पाया जाता है इसलिए संप्लीमेंट्स द्वारा इसका सेवन रेकमेंडेड है।

कार्बोहाइड्रेट्स – जहां एक ओर प्रोटीन और फैट हॉर्मोन्स के लिए बिल्डिंग ब्लॉक्स होते हैं, वहीं दूसरी ओर, कार्बोहाइड्रेट्स उन्हें बनाने हेतु आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं। कार्बोहाइड्रेट्स की प्राप्ति के लिए न्यूट्रीएंट्स से भरपूर फल व सब्जियों का सेवन करना चाहिए जो विटामिन्स और मिनरल्स प्रदान कर हॉर्मोन्स का संतुलन बनाए रखते हैं।

फैट – हॉर्मोन्स का उत्पादन फैट और कॉलेस्ट्रॉल से होता है इसलिए हॉर्मोन्स की कार्यशीलता और संतुलन के लिए फैट बहुत आवश्यक है।

जिंक –  एक अत्यंत महत्वपूर्ण मिनरल है जो शरीर में एरोमाटेज जामक एंजाइम का उत्पादन कम कर कैंसर के खतरे से बचाता है। जिंक की कमी त्वचा रोग, बालों का झड़ना, घावों का देरी से भरना, दंत रोग, आदि रोगों को भी जन्म देसकती है। साबुत अनाज, बादाम, काजू, खुबानी, कीवी, आदि जिंक के स्रोत हैं। जिंक कई हॉर्मोन्स जैसे थायरोक्सिन, प्रोजेस्टेरोन, कोर्टीसोल, आदि के उत्पादन व संतुलन के लिए बहुत जरूरी होता है।

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डिनडोलिलमिथेन – यह एक प्राकृतिक तत्व है जो पत्तागोभी, फूलगोशी, केल, आदि सब्जियों में पाया जाता है। डिजडोलिलमिशेज एस्ट्रोजन नामक हार्मोन के स्तर में वृद्धि को रोकता है और कई तरह के कैंसर, विशेषतः स्तन कैंसर और प्रोस्ट्रेट कैंसर से बचाव में सहायक है।

एवोकैडोये फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटामिन E, B विटामिन्स और फोलिक एसिड प्रदान करता है जो हॉर्मोन्स के संतुलन को कायम रखने में सहायक है।

ऑलिव ऑयल ऑलिव ऑयल में पाए जाने वाले स्वास्थ्यकारी फैट कोशिकाओं की मेम्ब्रेन को स्वस्थ व क्रियाशील रखते हैं जिससे हॉर्मोन्स सुगमता से कोशिकाओं मे प्रवेश कर पाते हैं।

इवनिंग प्रिमरोज़ ऑयलइस ऑयल में ज़रूरी फैटी एसिड्स प्रचुर मात्रा में होते हैं और यह प्री मेन्सटूअल सिंड्रोम में होने वाले हॉर्मोनल असंतुलन को ठीक करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।  

डीएचए – डोकोसाहेक्साएनोइक एसिड (डीएचए) का सेवन न सिर्फ ब्रेन आर्गन डेवलपमेंट के लिए जरूरी है बल्कि हॉर्मोन के संतुलन के लिए भी आवश्यक है। पोषक तत्व पूरक नामक दवाओं की श्रेणी से सम्बन्ध रखता है। डीएचए, मस्तिष्क के विकास में एक अतिमहत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डीएचए, कोलेस्ट्रॉल और ट्राईग्लाईसेराइड के स्तर को कम करता है, प्लेटलेट एकत्रीकरण और एलडीएल के आक्सीकरण को रोकता है, सूजन पैदा करने वाले घटकों जैसे प्रोस्टाग्लैंडीन के संश्लेषण को कम करता है। कुल मिलाकर, डीएचए, हृदय और रक्तसंचार सम्बन्धी रोग के जोखिम को कम करने में एक अतिमहत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इन सब पोषक तत्वों का उचित मात्रा में नियमित सेवन हॉर्मोनल असंतुलन को ठीक करने में सहायक है। इसके अतिरिक्त जंक फूड, सॉफ्ट ड्रिंक, मैदा, वेजिटेबल ऑयल, कॉफी, ऑयली फूड, आदि खाने से बवें क्योंकि इनका ज्यादा सेवन हॉर्मोन्स की मात्रा को असंतुलित कर सकता है।

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