उम्र के साथ होने वाली मसल्स और हड्डियों की हानि | Muscle and bone loss with age

Muscle and bone loss with age
Muscle and bone loss with age

शरीर में मांसपेशियों और हड्डियों की भूमिका | Role of muscles and bones in the body

हमारे शरीर के लिए मसक्यूलोस्केलेटल सिस्टम (हड्डियों व मांसपेशियों से बना तंत्र) बहुत महत्वपूर्ण है। हड्डियां और मसल्स चलने-फिरने में, सांस लेने में, सीधा खड़ा रहने में तो मदद करती ही हैं, ये कई अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी करती हैं। हड्डियों में कैल्शियम संचित रहता है जो नसों (नर्व्स) व मसल्स के सुचारू रूप से काम करने के लिए अति आवश्यक है।

हड्डियां हमारे शरीर को गतिशीलता, सहारा और सुरक्षा देती हैं और मिनरल्स के भंडारण का प्रमुख स्थान हैं। मसल्स में हमारे शरीर में उपस्थित कार्बोहाइड्रेट्स का 80% हिस्सा संचित रहता है। ताजा शोधों में सिद्ध हुआ है कि मसल्स ग्लूकोज़ के मेटाबॉलिज्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वास्तव में हड्डियों और मसल्स के बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते।

बोन रीमॉडलिंग क्या है? | What is bone remodeling?

विभिन्‍न देशों में हुए शोधों के अनुसार हमारी मसल्स व हड्डियों की स्थिति उम्र भर एक जैसी नहीं रहती। हड्डियों के बनने और नष्ट होने की प्रक्रिया हमारे शरीर में लगातार चलती रहती है। पुरानी जीर्ण हो चुकी हड्डियों को ऑस्टियोक्लास्ट जामक विशेष कोशिकाएं नष्ट करती रहती हैं व ऑस्टियोब्लास्ट नामक कोशिकाएं नयी हड्डियों का निर्माण करती हैं। इस सुर्ण प्रक्रिया को ‘बोन रीमॉडलिंग’ कहते हैं। सामान्यत: 35 वर्ष की उम्र तक हडियों के नष्ट होने व निर्माण की प्रक्रिया में संतुलन बना रहता है और हड्डियों की मात्रा एक जैसी बनी रहती है। 

‘बोन लॉस’ किसे कहते हैं? 35 वर्ष के बाद हड्डियों मांसपेशियों का क्या होता है? | What is ‘Bone Loss’? What happens to bones and muscles after age 35?

35 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियों के नष्ट होने व नई हड्डियों के बनने की प्रक्रिया असंतुलित हो जाती है और जितनी मात्रा में डड्डियां नष्ट होती हैं, उससे कम मात्रा में नई हड्डियों का निर्माण होता है। परिणामस्वरूप, हड्डियों की कुल मात्रा में कमी आने लगती है और यह कमी बढ़ती उम्र के साथ-साथ बढ़ती जाती है। इस स्थिति को ‘बोन लॉस’ कहते हैं।

इससे हड्डियों की गुणवत्ता व कार्यशीलता घटती है और उम्र बढ़ने के साथ-साथ हड्डियां भुरभुरी, कमजोर व नाज़ुक हो जाती हैं और इनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। इस पूरी प्रक्रिया से हमारे जोड़ भी प्रभावित होते हैं, जोड़ों में दर्द होने लगता है और उनकी गतिशीलता कम हो जाती है। बढ़ती उम्र के साथ न सिर्फ हड्डियों की बल्कि मसल्स की भी लगातार क्षति होती रहती है।

35 वर्ष की उम्र के बाद हर साल मसल मास में करीव 1% की क्षति होती है। इससे मसल्स कमजोर हो जाती हैं और उनकी कार्यक्षमता घटने लगती है। मसलस में होने वाली इस क्षति व कार्यशीलता में कमी जोड़ों के कार्य को भी प्रभावित करती है। जोड़ों पर अतिरिक्त दवाव पड़ने लगता है और उनकी संरचना बदलने लगती है।

मसल्स को होने वाली क्षति मसल्स की मज़बूती को कम कर देती है, मसल्स का मेटाबॉलिज्म घटा देती है और उन्हें बहुत नुकसान पहुंचा सकती है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ मसल्स की क्षति में सुधार होने की प्रक्रिया भी धीमी पड़ने लगती है और कमजोरी, थकान, शारीरिक दर्द, चलने की गति में कमी, उठने बैठने में परेशानी, आदि लक्षण दिखने लगते हैं। मसल मास में कमी होने का एक और कारण उम्र के साथ एनाबॉलिक हेर्मोन के उत्पादन में कमी होना भी है।

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टेस्टोस्टेरोन, ग्रोथ हॉर्मोन जैसे हॉर्मोन्स के उत्पादन में कमी मसल मास व मसल्स की मज़बूती में कमी ला सकती है। कैंसर, सीओपीडी (सांस संबंधित समस्या), हृदय रोग, आर्थराइटिस, आदि रोगों में भी मसल्स की हानि होती है। बढ़ती उम्र के साथ भोजन की मात्रा में भी कमी आती है जिससे भी मसल्स्र की क्षति होती है। 

स्वस्थ मसल्स और सुदृढ़ हड्डियों के लिए यह जरूरी है कि युवावस्था से ही उचित पोषक तत्वों का सेवन किया जाए ताकि बढ़ती उम्र के साथ होने वाली मसल्स व हड़ियों की हानि को रेका जा सके। वैज्ञानिकों के अनुसार एक संतुलित आहार जो पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोर्स, आदि मिनरल्स और विटामिन A, B, C, D, E और K जैसे विटामिन्स व प्रोटीन की पूर्ति कर सके, मसल्स और हड़ियों की हानि रोकने में सहायक हो सकता है। 

प्रोटीन की भूमिका | Role of protein

बढ़ती उम्र के साथ मसल्स को होने वाली क्षति को थामने में प्रोटीन की भ्रुमिका बहुत महत्वपूर्ण है। प्रोटीन, एमिनो एसिड्स का स्रोत है जो मसल प्रोटीन के निर्माण के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं। प्रोटीन का सेवन नाइट्रोजन के संतुलन को बरकरार रखता है और मसल्स की क्षति को कम करता है। 

उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन के अलावा कैल्शियम, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम व पोटेशियम युक्त आहार व न्यूट्रीशनल संप्लीमेंट्स का सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। कैल्शियम संप्लीमेंट्स लेने वाले व्यक्तियों में हड्डियों की हानि में कमी आती है व हड्डियों के भुरभुरे होने और फ्रेक्चर होने की संभावजा काफी घट जाती है। विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण व उपयोग के लिए जरुरी है और मसल्स की कार्यक्षमता बढ़ाता है। इसके अलावा विटामिन A, विटामिन K, जिंक, कॉपर और आयरन जैसे माइक्रोन्यूट्रीएंट्स भी हड्डियों और मसल्स को स्वस्थ रखने और उनकी क्रियाशीलता बनाए रखने में सहायक होते हैं। 

अत: यह जरूरी है कि बढ़ती उम्र के साथ होने वाली मसल्स व हड्डियों की क्षति से बचने के लिए हम सही समय पर पोषक तत्वों से परिपूर्ण न्यूट्रीशनल संप्लीमेंट्स का सेवन शुरू कर दें। 

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