अंतर्कालीन उपवास के फायदे | Benefits of Intermittent Fasting

Intermittent Fasting
अंतर्कालीन उपवास | Intermittent Fasting

उपवास या फास्टिंग सदियों से विश्व भर में विभिन्न सभ्यताओं और सभी धर्मों के लोगों द्वारा अपनाया गया शारीरिक व मानसिक है नवीनीकरण का एक तरीका है। कुछ समय तक आहार से स्वैच्छिक संयम (फास्टिंग) का दुनिया भर में अभ्यास किया जाता है। सही तरीके से किए गए उपवास या फास्टिंग के कई शारीरिक लाभ सिद्ध हुए हैं। फास्टिंग करने से शरीर में फैट ईंधन की तरह जलने लगता है व कीटोन बॉडीज नामक तत्वों का निर्माण होने लगता है। फास्टिंग करने से शारीरिक मेटाबॉलिज्म व कोशिकाओं की आंतरिक क्रियाओं में सकारात्मक परिवर्तन होते हैं और हमारी तनाव सहने की क्षमता (स्ट्रेस रेजिस्टेंस) बढ़ती है। विभिन्न वैज्ञानिक शोधों से सिद्ध हुआ है कि हम वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए तरीकों व विभिन्न पद्धतियों से की गई फास्टिंग द्वारा असामान्यत: अधिक वजन या बॉडी फैट को घटाने, असमय बुढ़ापे को टालने व लंबी उम्र तक स्वस्थ रहने में सफलता पा सकते है। फास्टिंग के दौरान शरीर में एडिपोलेक्टिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है जो शरीर में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाता है यानि इंसुलिन रजिस्टेंस घटाता है।

अत: नियोजित फास्टिंग से डायबिटीज से बचाव होता है, मोटापा घटता है, हृदय व रक्‍त संचार को स्वस्थ रखतले में मदद मिलती है और ब्लड प्रेशर घटता है। फास्टिंग के हमारे तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) के स्वास्थ्य और मस्तिष्क की कार्यक्षमता व एकाग्रता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं और कैंसर से बचाव व उसके उपचार में भी मदद मिल सकती है। फास्टिंग करने पर शरीर में आंतरिक सूजन (इंफ्लेमेशन) घटती है, स्वास्थ्य संबंधी कई शारीरिक बायोमार्कर्स में सुधार होता है, विभिन्न अंगों व प्रणालियों को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से होने वाली ऑक्सीडेटिव क्षति (स्ट्रेस या तनाव) घटती है, सोचने-समझने की मानसिक कार्यक्षमता व याददाश्त का उम्र के साथ होने वाला क्षय थमता है व ब्रेन की क्षति से बचाव होता है। फास्टिंग करने से शारीरिक कोशिकाएं तनाव सहने व रोगों से खुद के बचाव के लिए ज्यादा सक्षम बनती हैं। फास्टिंग के रयूमेटाइड आर्थराइटिस से बचाव में भी अच्छे प्रभाव सिद्ध हुए हैं। 

दैनिक आहार में ली जाने वाली कैलोरीज में थोड़ी कमी लाने (कैलोरी रेस्ट्रिक्शन) से शरीर में बॉडी फैट, ट्राइग्लिसराइड्स, कुल कोलेस्ट्रॉल, हानिकारक एल डी एल कोलेस्ट्रॉल, कमर का घेरा, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, इंसुलिन व इंफ्लेमेशन दर्शाने वाले केमिकल्स के स्तर घटते हैं, ग्लाइकोसिलेटेड डीमोग्लोबिन यानि HbA1C (पिछले ३ महीने का औसत ब्लड-शुगर का स्तर दर्शाने वाला बायोमार्कर) के स्तर में सुधार होता है व IGF-1 नामक कैंसर के कारक तत्व का स्तर भी घटता है। फास्टिंग करने से क्षतिग्रस्त आनुवंशिक गुण सूत्रों (DNA) वाली कोशिकाएं कैंसर-ग्रस्त कोशिकाओं में तब्दील होने की जगह स्वत: नष्ट होने लगती हैं। 

क्या लंबे समय तक लगातार भूखे रहना उचित है? | Is it good to stay hungry for a long time?

लंबे समय तक लगातार भूखे रहने या काफी कम कैलोरी वाला आहार लेने से अत्यधिक भूख लगती है व अनाप-शनाप खाने की संभावना बढ़ती है। साथ डी लगातार लंबे समय तक उपवास रखने से हमारा शरीर कम कैलोरीज से काम चलाना सीख लेता है व उपवास करते रहने पर भी उपवास के और अधिक शारीरिक फायदे नहीं मिल पाते। इसलिए लंबी फास्टिंग की जगह अब इंटरमिटेंट फास्टिंग (अंतर्कालीन उपवास) की पद्धति प्रसिद्ध दो रही है। 

इंटरमिटेंट फास्टिंग (अंतर्कालीज उपवास) | Intermittent Fasting

पिछले कुछ वर्षों में वैज्ञानिकों ने उपवास करने के शारीरिक फायदों के बारे में काफी जानकारी जुटाई है। उपवास करने का मतलब अनियोजित अनशन नहीं है। उपवास करने का मतलब एक पूर्वनिर्धारित व सुनियोजित तरीके से कुछ खाने और न खाने की समयाविधी को निश्चित करना है। दिनभर में लगातार 10 घंटे या अधिक समय तक भूखे रहने से शरीर में फास्टिंग की स्थिति बनती है। 

इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) करने के मुख्यत: दो प्रचलित तरीके हैं
  • पहला तरीका रोज़ाना फास्टिंग – यानि प्रतिदिन 24 घंटे में सिर्फ 12 घंटे के समय के दौरान ही आहार लेना और बाकी 12 घंटे तक लगातार कुछ न खाना।
  • दूसरा तरीका सप्ताह में 6 दिन सामान्य आहार लेना व 1 दिन सिर्फ तरल पदार्थ (500 से 600 कैलोरी) ही लेना। 

कामकाजी लोगों त विभिन्न प्रकार की दिनचर्या वाले लोगों को ध्यान में रखते हुए व्यवहारिक रूप से इंटरमिटेंट फास्टिंग (अन्तर्कालीन उपवास) करने का अर्थ है 24 घंटे में कम से कम 10 घंटे और आदर्श तौर पर 12 घंटे का सतत उपवास या कुछ न खाना और बाकी समय कम कैलोरी वाला पोषक आहार लेला। इसके लिए हम 24 घंटे के समय को दो भागों में विभाजित करते हैं एक भाग में हम उपवास या फास्टिंग करते हैं यानि कुछ नहीं खाते व दूसरे भाग में हम सामान्य आहार लेते हैं। लेकिन जितनी समयावधि में हम आहार होते हैं उसमें – 

  • हमें दिन भर में 3 या 4 बार ही खाना चाहिए जैसे नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम का नाश्ता और रात का भोजन। 
  • हमें अत्यधिक फैट, शक्कर, नमक या कैलोरीज़ से युक्त आहार नहीं लेना चाहिए ताकि हम सामान्य से कम कैलोरी खाएं। आहार लेने की पूर्ण अवधि में भी हमें कच्चे फल-सब्जियों व फायबर युक्त आह्वार लेना चाहिए। हमें कैलोरी डेफिसिट की स्थिति में रहना चाहिए। 
  • खाना खाने की अवधि में हमें पर्याप्त मात्रा में उच्च गुणवत्ता का प्रोटीन लेना चाहिए ताकि हमारी मसल्स की हानि न हो। 
  • 4. मसल्स बचाए रखने के लिए हमें नियमित व्यायाम भी करना चाहिए। रोजाना कम से कम 6000 कदम पैदल चलकर और 250 सीढ़ियां चढ़कर हम अपने पूरे शरीर को पर्याप्त व्यायाम दे सकते हैं। 
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रोजाना इंटरमिटेंट फास्टिंग/ Intermittent Fasting करना फास्टिंग के अन्य तरीकों (जैसे हर सप्ताह 1 दिन कुछ न खाना) से ज्यादा आसान है व हमारे मेटाबॉलिज्म पर इसका कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता। पूरे-पूरे दिन भूखे रडने के बाद आहार लेने पर शरीर के मेटाबॉलिज्म में तेज उतार-चढ़ाव होते हैं जो अस्वास्थ्यकारी हो सकते है। इससे इंसुलिन की प्रभावशीलता घट सकती है और लिवर तथा मसल्स में ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा बढ़ सकती है और लिवर की ऑक्सीडेटिव क्षति (स्ट्रैस या तनाव) भी बढ़ सकती है। हमारा मेटाबॉलिज्म उस स्थिति में उत्तम कहलाता है जब हमारा शरीर विभिन्न पोषक तत्वों का अवशोषण कर, आवश्यकतानुसार फैट या कार्बोहाइड्रेट को ईंधन के रूप में ऊर्जा के उत्पादन के लिए उपयोग कर सके, लेकिन मोटे या अधिक बॉडी फैट वाले लोग ऐसा नहीं कर पाते। मेटाबॉलिज्म में इस लचीलेपन की कमी से ही इंसुलिन रेजिस्टेंस व डायबिटीज जैसी स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। 

14 घंटे में लगातार 10-12 घंटे कुछ न खाने से लिवर शरीर के अंदर जमा बॉडी फैट को ईंधन के रूप में जलाने लगता है जिससे रक्त में कीटोन बॉडीज़ नामक पदार्थ पहुंचने लगते हैं जो हमारे मस्तिष्क के लिए उपयोगी होते हैं। ये हमारी याद करने की मानसिक क्षमता को बढ़ाते हैं और मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले रोगों की रोकथाम करते हैं। 

इंटरमिटेंट फास्टिंग का तरीका | Method of intermittent fasting

इंटरमिटेंट फास्टिंग के लिए कम से कम 10 घंटे और आदर्श तौर पर 12 घंटे आपको भूखा रहना चाहिए मतलब अगर आपने रात को 9 बजे खाना खाया है तो सुबह 9 बजे आपके 12 घंटे पूरे होते है। सुबह 7 से 9 के बीच नाश्ते की जगह आप एक प्रोटीन शेक ले सकते हैं। प्रोटीन शेक आप लो फैट दूध, नट मिल्क या पानी के साथ ले सकते हैं। पानी के साथ प्रोटीन शेक लेने पर आपको 75 कैलोरी ही मिलती है। नट मिल्क (पौधों से प्राप्त दूध) से आपको पानी की तुलना में थोड़ी ज्यादा कैलोरी मिलेगी व एक गिलास लो फैट दूध के साथ 15 ग्राम प्रोटीन वाला शेक लेने से आपको 200 कैलोरी मिलेगी। सर्वश्रेष्ठ यह होगा कि आप प्रोटीन शेक को पानी के साथ लें। प्रोटीन शेक को पानी में लेले से यह होगा कि इससे आपको अत्यधिक कैलोरी नहीं मिलेगी और पेट भर जाएगा तो भूख से भी राहत मिलेगी। प्रोटीन शेक के साथ विटामिन मिनरल की टेबलेट लेना अत्यंत लाभकारी है। ऐसा करने से आपकी इंटरमिटेंट फास्टिंग भी जारी रहेगी और आपको PVMF यानि प्रोटीन, विटामिन, मिनरल व फायबर युक्त नाश्ता मिलेगा। प्रोटीन शेक में मिठास के लिए आप चाहें तो प्राकृतिक स्वीटनर, गुड़, खांडसारी या रॉ-शुगर का उपयोग कर सकते हैं। ध्यान रहे कि सफेद शक्कर का उपयोग बिल्कुल भी न करें वरना इंटरमिटेंट फास्टिंग का कोई लाभ भी नहीं होगा क्योंकि सफेद शक्कर तेजी से इंसुलिन को बढ़ाती है। PVMF का नाश्ता करने के 4 घंटे बाद आप अपना दोपहर का भोजन कर सकते हैं। 

डंटरमिटेंट फास्टिंग को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए अन्य किसी भी प्रकार के नाश्ते के बजाए PVMF ब्रेकफास्ट लेना सर्वश्रेष्ठ है। 

इंटरमिटेंट फास्टिंग के प्रूवन फायदे | Proven advantages of intermittent fasting  

कुछ अध्ययनों में अस्थमा (दमा) से प्रभावित असामान्यत: ज्यादा वजन वाले कई रोगियों द्वारा इंटरमिटेंट फास्टिंग करने पर शारीरिक ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इन्फ्लेमेशन (सूजन) में कमी आई व अस्थमा के लक्षण भी घटे। अन्य शोधों में वैज्ञानिकों ने वजन घटाने और इंसुलिन की क्रियाशीलता के सुधार में इंटरमिटेंट फास्टिंग को लाभकारी पाया। एक अन्य शोध से पता चला कि दिनभर में 10 से 16 घंटे का उपवास रखने पर शरीर में जमा बॉडी फैट का ईंधन के रूप में इस्तेमाल शुरू हो जाता है व इस प्रक्रिया में कीटोज बॉडीज़ नामक पदार्थ रक्त में प्रवाहित होने लगते हैं। फलस्वरूप, तंत्रिकाओं की कोशिकाओं का बचाव होता है और हमारी याददाश्त व सोचने-समझने की क्षमता की हानि थम जाती है। इससे हमें अपना जीवन-काल बढ़ाने में मदद मिल सकती है व कैंसर से बचाव भी होता है। 

कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार वजन नियंत्रण, बॉडी फैट, इंसुलिन की प्रभावशीलता बढ़ाने में इंटरमिटेंट फास्टिंग उतनी ही प्रभावी है जितना सतत बहुत कम कैलोरीज़ का आहार लेते रहना और वह भी स्वास्थ्य पर बिना किसी दुष्प्रभाव के। हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार वर्षों से डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों में भी विशेषज्ञों की सलाह से की गई इंटरमिटेंट फास्टिंग से कुछ मरीजों की डायबिटीज़ की दवा पर निर्भरता पूर्णतः खत्म हो गई व कुछ अन्य की दवा की मात्रा की आवश्यकता घटकर काफी कम रह गई। अधिक आयु के व्यक्तियों में इंटरमिटेंट फास्टिंग करने से बॉडी फैट घटा और मूड में सुधार दिखा। 

वैज्ञानिकों ने इंटरमिटेंट फास्टिंग के कई स्वास्थ्यकारी प्रभाव सिद्ध किए हैं जैसे – 
  • वजन में स्थाई कमी
  • डायबिटीज, हृदय-रोग व कैंसर से बचाव
  • मस्तिष्क का बेहतर स्वास्थ्य 
  • शारीरिक शक्ति व फिटनेस में सुधार
  • शरीर में आंतरिक सूजन और ब्लड प्रेशर में कमी व दिल की धड़कन में सुधार 
  • हृदय व धमनियों का बेहतर स्वास्थ्य
  • उम्र के साथ पनपने वाले पार्किसन्स व अल्जाइमर जैसे डीजेनेरेटिव न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका तंत्र के) रोगों से बचाव
  • शारीरिक कोशिकाओं के तनाव (स्ट्रेस) व इन्फ्लेमेशन (सूजन-जो कई रोगों का बुनियादी कारण है) में कमी 

किन्हें इंटरमिटेंट फास्टिंग नहीं करना चाहिए | Who should not do intermittent fasting

कुछ लोगों को इंटरमिटेंट फास्टिंग नहीं करनी चाहिए। जिन लोगों को थोड़ी-थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाना आवश्यक होता है, जैसे गर्भवती महिलाएं या दूध पिलाने वाली माताएं, बुजुर्गों, बीमार लोगों या फिर ऐसे लोग जिन्हें दवा लेने के लिए समय-समय पर कुछ न कुछ खाना जरूरी है, उन्हें अपने डॉक्टर की सलाह से ही किसी भी प्रकार का उपवास करना चाहिए। 

निष्कर्ष

मित्रों उम्मीद है की आपको यह जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर और भी कुछ आपके सुझाव हैं तो आप हमें कमेंट बॉक्स लिखकर भेज हैं। निश्चित ही हम आगे भविष्य में इस तरह की स्वास्थ्यवर्धक जानकारी आप लोगों के लिए लेकर आते रहेंगे। बस आपका सहयोग बना रहे।

धन्यवाद

मनीष यादव

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