What are Digestive Enzymes? / डायजेस्टिव एन्जाईम्स क्या है?

पाचन के बारे में सबसे बड़ा भ्रम यह है कि लोग भरपेट भोजन करने और मल त्याग करने को ही पाचन समझते हैं।पावन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आहार से पोषक तत्वों को अवशोषित करना है। पाचन की सही परिभाषा है, भोजन करने के बाद सभी पोषक तत्वों का शरीर में अवशोषण व अपशिष्ट पदार्थों का शरीर से बाहर निकलना। विभिन्न ग्रंथियों से स्रावित कई एंजाइमों की मदद के बिना पाचन प्रक्रिया को पूरा नहीं किया जा सकता। डायजेस्टिव एंजाइम (Digestive Enzymes) पाचन तंत्र में पाए जाते हैं जहां वे भोजन के बेहतर अवशोषण के लिए खाद्य पदार्थों को छोटे-छोटे भागों में तोड़ते हैं।

बढ़ती उम्र के साथ, शरीर में एंजाइमों का स्त्राव घटता है, जिससे पाचन अधूरा रहता है और कब्ज़ व पेट फूलना जैसे लक्षण हो सकते हैं। लोगों में एक आम धारणा है कि पेट साफ करने वाले जुलाब (लेक्ज़ोटिव) पाचन सुधारते हैं इसलिए लोग इन्हें लेते हैं। लेकिन लेक्ज़ेटिव पदार्थ पोषक तत्वों के पाचन या अवशोषण में कोई मदद नहीं करते। ये केवल पेट साफ कर कुछ देर राहत देते हैं। ये बड़ी आंत से अपशिष्ट के साथ-साथ पानी, मिनरल, अपाच्य फायबर व इलेक्ट्रोलाइट तत्वों को भी बाहर निकाल देते हैं जो हमारे शरीर के लिए बहुत हानिकारक होता है।  

जुलाब (लेक्ज़ेटिव) के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव: सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, आदि इलेक्ट्रोलाइट तत्व व मिनरल तंत्रिकाओं, मांसपेशियों, आंतों तथा हृदय के ठीक से कार्य करने के लिए जरुरी होते हैं। लेक्ज़ेटिव लेने से शरीर में इन इलेक्ट्रोलाइट्स के असंतुलन के साथ-साथ डिहाइड्रेशन (पानी की कमी)  हो सकता है। लंबे समय तक लेक्ज़ेटिव लेने से आंतों, मलाशय, लिवर, आदि की क्षति और पेट के कैंसर का जोखिम हो सकता है।

What is Enzymes? / एंजाइम क्या होते हैं?
एंजाइम (Enzymes) जीव-जंतुओं में रासायनिक क्रियाओं की दर को बढ़ाने वाले प्रोटीन होते हैं। डायजेस्टिव एंजाइमा पाचन तंत्र में पाए जाते हैं जहाँ वे भोजन को पचाने में सहायता करते हैं। डायजेस्टिव एंजाइम शरीर द्वारा आहार से पोषक तत्वों के अो अवशोषण के लिए आहार के बड़े व जटिल कणों को छोटे अणुओं में तोड़ते हैं। डायजेस्टिव एंजाझा विविध प्रकार के होते हैं, जो लार ग्रंथियों द्वारा सावित लार में, आमाशय की अंदरुनी झिल्ली के स्राव में, पेन्क्रिआज द्वारा सावित होने वाले कोशिकाओं के पेन्क्रिएटिक रस में, आंतों (होटी व बड़ी) केस्राव में या पाचन तंत्र के मार्ग की अंदरूनी डिल्लियों में पाए जाते हैं। 

एमाइलेज एंजाइम (कार्बोहाइड्रेट का विघटन करने वाले वाले एंजाइम):

भोजन के बाद हमारी लार में मौजूद एंजामों द्वारा पाचन शुरू होता है। पेनक्रियाज़ और लार ग्रंथि बनने वाले एमाइलेज एंजाइम आहार में मौजूद स्टार्च को सरल कार्बोहाइड्रेट्स में विघटित करते है जिन्हें अन्य एंजाइमों द्वारा शरीर में ऊर्जा की आपूर्ति के लिए ग्लूकोज में परिवर्तित कर दिया जाता है। स्टार्च से भरपूर चावल व आलू जैसे खाद्य पदार्थ भारतीय आहार में कार्बोहाइड्रेट के प्रमुख स्रोत हैं।

प्रोटिएज एंजाइम (प्रोटीन का विघटन करने वाले प्रोटियोलाइटिक एंजाइम):

प्रोटिएज एंजाइम प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को शरीर के लिए आवश्यक एमिनो एसिड्स में विघटित करते हैं जो होटी आंत द्वारा अवशोषित हो जाते हैं और विभिन्न शारीरिक कार्य करते हैं। पोषक तत्वों को सही जगह पर पहुंचाने, रोगप्रतिरोधक प्रणाली के रख-रखाव, शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और उचित खत संचार के लिए प्रोटीन का सही पाचन बहुत जरूरी है।

लाइपेज़ (फैट का विघटन करने वाले वाले एंजाइम):

हमारे पाचन तंत्र में ह्यूमन पेन्क्रिएटिक लाइपेज डायट्री फैट का फैटी एसिड और ग्लिसरॉल में विघटन करने वाला मुख्य एंजाइम है। लाइपेज आहार में लिए गए तेलों में मौजूद ट्राइग्लिसराइड्स को मोनोग्लिसराइड और फैटी एसिड्स में परिवतित करता है। ये फैटी एसिड छोटी आंत में अवशोषित होते हैं व अनेक शारीरिक कार्य करते हैं।  

पपेन (पपीते से निकाला जाने वाला एक शक्तिशाली डायजेस्टिव एंजाइम):

पपेन प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को पचाने वाला एंजाइम है। प्रोटियोलाइटिक के रूप में इसका उपयोग आघात व सर्जरी के बाद शरीर में द्रव्यों का जमाव घटाने; परजीवी कीड़ों के संक्रमण, गले में सूजन, दस्त, नाक बहने और सोरायसिस नामक त्वचा रोग और ट्यूमर के उपचार के लिए भी किया जाता है। दर्द व सूजन कम करने के लिए इसका बाह्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है।

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