Black Seed Oil / ब्लैक सीड ऑयल (कलौंजी का तेल)

Black Seed Oil / ब्लैक सीड साल में एक बार पैदा होने वाली जड़ी बूटी है जिसके कई औषधीय गुण हैं। पारंपरिक उपवारों में ब्लैक सीड व उसके ऑयल का उपयोग 2000 वर्षों से भी अधिक समय से किया जा रहा है।

ब्लैक सीड के बारे में कहा जाता है कि इसमें मौत को छोडकर हर बीमारी का इलाज है। भारतीय व अरब सभ्यताओं में इसका उपयोग भोजन और दवा के रूप में पावन तंत्र, श्वसन तंत्र, किडनी, लिवर, हृदय व इम्यूनिटी से संबंधित समस्याओं के इलाज में किया जाता रहा है।

ब्लैक सीड व उसके ऑयल का उपयोग स्वास्थ्य अच्छा रखने के लिए भी किया जाता है। ब्लैक सीड में पाए जाने वाले कई सक्रिय घटकों में थायमोक्यूनॉन ब्लैक सीड ऑयल में सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला घटक है जिसके कई गुण होते हैं। थायमोक्यूनॉन में सूजन, कमज़ोर इम्यूनिटी, मेटाबॉलिक सिंड्रोम, आदि कई रोगों के इलाज के गुण मौजूद हैं। इसके अलावा थायमोक्यूनॉन मिर्गी के दौरे को कम करता है।

कई शोधों में थारामोक्यूनॉन के कैंसररोधी, एंटीमाइक्रोबियल, दर्द निवारक, बुखार कम करने वाले, एंटीआक्सीडेंट गुण भी सिद्ध किए गए हैं। थायमोक्यूजॉन के रक्त, ब्रेस्ट, कोलोन, पेनक्रियाज, लिवर, फेफड़े, प्रोस्टेट व सर्विक्स कैंसर के विरुद्ध कैंसर रोधी गुण भी हैं।

वो महिलाएं जिनका मेनोपॉज हो चुका है, उनकी हड़ियों को हो रही हानि से बचाव में भी ब्लैक सीड ऑयल का सेवन लाभकारी है। ब्लैक सीड ऑयल का सेवन रक्त में मौजूद बुरे कॉलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, ग्लायकोसायलेटेड हीमोग्लोबिन के स्तर को घटाता है।

ब्लैक सीड ऑयल ब्लडप्रेशर व ब्लड-शुगर को कम करता है। यह इंसुलिन की मात्रा को बढ़ाता है जिससे यह डायबिटीज के रोग में भी लाभकारी है। वैज्ञानिकों के अनुसार सफेद दाग जैसी समस्या में ब्लैक सीड ऑयल मल्ली के तेल से भी ज्यादा प्रभावी होता है।

यह लिवर रक्षक गुणों से भरपूर है और लिवर की कार्य क्षमता बढ़ाता है जिस कारण यह हेपेटाइटिस रोग में भी लाभकारी है। पुरुषों में प्रजनन तंत्र से संबंधित समस्याओं के उपचार में यह फायदेमंद है और गठिया व उसके लक्षणों को घटाता है। 35 वर्ष के बाद होने वाली हड़ियों की हानि में भी ब्लैक सीड ऑयल लाभकारी होता है। ब्लैक सीड ऑयल का सेवन आंतों की खराबी से होने वाले नुकसान से भी बचाता है।

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