What is Beta-Carotene Lutein and Zeaxanthin? | बीटा-कैरोटीन, ल्यूटीन व जियाजेन्थिन क्या है ?

बीटा-कैरोटीन (Beta-Carotene) प्राकृतिक रूप से मिलने वाला पीला, नारंगी और लाल रंग का पिगमेंट है जो सबसे शक्तिशाली कैरोटीनॉयड एंटीऑक्सीडेंट है। कैरोटीनॉयड एंटीऑक्सीडेंट पौधों से प्राप्त होते हैं और शरीर के लिए आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। प्राकृतिक रूप से मिलने वाला बीटा-कैरोटीन दो तरह से स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है:

प्रो-विटामिन ‘ए’ के रूप में यह, जब भी शरीर को आवश्यकता होती है, विटामिन ‘ए’ में परिवर्तित हो जाता है और एक एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कोशिकाओं और टिश्यू को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स को नष्ट करता है।

शरीर की आवश्यकतानुसार विटामिन ए में परिवर्तित हो कर बीटा कैरोटीन (Beta-Carotene) एक ओर तो विटामिन ए की अधिकता से होने वाले संभावित दुष्प्रभाव नहीं करता व दूसरी ओर, आंखों को स्वस्थ रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

पर्याप्त मात्रा में बीटा कैरोटीन के सेवन से दृष्टि में सुधार हो सकता है व यह नेत्र विकार और मोतियाबिंद को बढ़ने से रोकता है।

ल्यूटीन व जियाजेन्थिन

Lutein and Zeaxanthin
Lutein and Zeaxanthin

ल्यूटीन और जियाजेनिथन (Lutein and Zeaxanthin) प्राकृतिक रूप से मेरीगोल्ड फ्लावर में सबसे प्रचुर मात्रा में पाये जाने वाले फैट में घुलनशील कैरोटीनॉयड एंटीऑक्सीडेंट होते हैं।

ल्यूटीन और जियाजैंथिन मेरीगोल्ड फ्लावर से 5:1 के अनुपात में निकाले जाते हैं यानी इसमें 20 प्रतिशत ल्यूटीन होता है और 4 प्रतिशत जियाजेन्थिन होता है।

उदाहरण के तौर पर, 100 मि.मा. मेरीगोल्ड फ्लावर के एक्सट्रेक्ट में 20% यानि 20 मिग्रा ल्यूटीन होता है और 4% यानि 4 मि.ग्रा. जियाजेन्थिन होता है।

आप मैरीगोल्ड पलावर भी खा सकते हैं लेकिन वो आपके शरीर में अवशोषित नहीं होगा।

मोबाईल फोन से निकलती है हानिकारक ब्लू लाईट

 

मोबाईल फोन से निकलती है हानिकारक ब्लू लाईट
मोबाईल फोन से निकलती है हानिकारक ब्लू लाईट

आजकल ज्यादातर लोग सोते-जागते. खाते-पीते, दफ्तर में और गाड़ी चलाते वक्त भी मोबाइल के भरपूर उपयोग से अपनी आंखों पर पूरा ज़ोर डालते हैं।

चेटिंग, ई-मेल, मैसेजिंग, सोशल मीडिया का उपयोग, मूवी, वीडियो, फोटो देखना, वीडियो कॉलिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, गेम्ज, आदि मोबाइल के लगभग अनवरत उपयोग के लिए जिम्मेदार हैं।

सूर्य की रोशनी 7 रंगों की किरणों (लाईट) से बनी होती है जो साथ मिलाकर सफेद या विजिबल लाईट बनाती हैं। इन सब में ब्लू लाईट को छोड़कर बाकि बची लाईट को हमारी आंखों की पुतली को ढंकने वाला हिस्सा (कॉर्निया) रोक लेता है व रेटिना तक पहुंचने नहीं देता, परंतु ब्लू लाईट बहुत शक्तिशाली होती है और यह आंखों के कॉर्निया व लेन्स से गुजर कर आंखों के रेटिना तक पंहुतकर उसे क्षतिग्रस्त करती है।

मोबाइल की स्क्रीन से भी निकलने वाली यही तीखी, अत्यधिक ऊर्जा वाली अदृश्य हानिकारक ब्लू लाईट आंखों के रेटिना को गंभीर क्षति पंहुचाती है व समय के साथ देखने की क्षमता घटा देती है।

हमारी आंखों के रेटिना की विशिष्ट फोटोरिसेप्टर कोशिकाएं आंखों पर पड़ने वाली लाईट्स को ब्रेन के लिए सिग्नल्स में बदलती हैं जिससे हम देख सकें।

मोबाइल की स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाईट जब रेटिना से टकराती है तो यह हानिकारक फोटोकेमिकल रासायनिक क्रियाओं की एक श्रृंखला को जन्म देती है जिससे रेटिना की इन फोटोरिसेप्टर कोशिकाओं को क्षति पहुंचती है।

विशेषतः अंधेरे में मोबाइल का उपयोग करने से उससे निकलने वाली हानिकारक ब्लू लाइट सीधे रेटिना तक पहुंच कर उसे क्षतिग्रस्त करती है जिससे आंखों की रोशनी धुंधली होने लगती है व देखने की क्षमता (आईसाइट) धीर-धीर घटने लगती है।

ब्लू लाईट के बढ़ते संपर्क को हमारी आंखें सह नहीं पाती जिससे आंखों का सफेद भाग लाल हो जाता है और आंखों में तनाव, सूखापन व थकान होने लगती है।

रात में कम लाईट या अंधेरे में बेड पर लेटकर मोबाइल का उपयोग करने से हानिकारक प्लू लाईट बढ़ावा मिलता है। स्लीप साइकिल (नींद के चक्र) को बाधित करती है जिससे अस्थाई ब्लाइंडनेस को भी बढ़ावा मिलता है।

ल्यूटीन व जियाजेंथिन द्वारा ब्लू लाइट के दुष्प्रभावों से आंखों का बचाव

ल्यूटीन व जियाजेंथिन द्वारा ब्लू लाइट के दुष्प्रभावों से आंखों का बचाव
ल्यूटीन व जियाजेंथिन द्वारा ब्लू लाइट के दुष्प्रभावों से आंखों का बचाव

दुर्लभ वंडर न्यूट्रीएंट्स ल्यूटीन और जियाजेंथिन के सेवन से हम मोबाइल की हानिकारक ब्लू-लाईट के दुष्प्रभावों से अपनी आंखों को बचा सकते हैं।

आंखों के रेटिना के बीचों-बीच मौजूद मेक्युला नामक संवेदनशील हिस्सा साफ-साफ देखने की क्षमता के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। ल्यूटीन और जियाजेनिथन मैक्युलर पिगमेंट कहलाते हैं क्योंकि यह आंखों के इस सबसे स्पष्ट दृष्टि वाले क्षेत्र (मैक्युला) और लेंस में प्रमुखता से एकत्रित हो जाते हैं व रेटिना को अत्यधिक ऊर्जा वाली हानिकारक ब्लू लाईट से बचाने के लिए एक फिल्टर की तरह काम करते हैं।

ब्लू-लाईट को फिल्टर करने की क्षमता के कारण ये फ्री रेडिकल्स के उत्पादन और उनसे होने वाली ऑक्सीडेटिव क्षति को सीमित करते हैं और त्वचा व आंखों को नुकसान से बचाते हैं।

एंटीऑक्सीडेंट्स के रूप में आंखों की कोशिकाओं की सुरक्षा द्वारा ये आंखों की विभिन्न बीमारियों व उम्र के साथ होने वाली दृष्टि की हानि का जोखिम घटाते हैं।

विभिन्न अध्ययनों से पता चला है कि ल्यूटीन और जियाजैंथिन के सेवन और आंखों के पिगमेंटेशन के बीच सीधा संबंध होता है।

आंखों के मैक्युला में इन पिगमेंट्स की वृद्धि से उम्र से संबंधित रेटिना की क्षति (मैक्युलर डैमेज) के कारण होने वाली सेंट्रल विजन (केंद्रीय दृष्टि) की हानि, जो अंधेपन का प्रमुख कारण है, का जोखिम घट जाता है।

40 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को, जिनकी आंखों में क्षति हो चुकी है, 20 मि.ग्रा. ल्यूटीन (जिसमें 4 मि.ग्रा. जियाजैंथिन हो) का सप्लीमेंटेशन और युवाओं को आंखों की क्षति से बचाव के लिए 1 मि.ग्रा. ल्यूटीन रोज लेना चाहिए।

उचित मात्रा में ल्यूटीन और जियाजैंथिन के नियमित सेवन से आंखों में तनाव, थकान, आंखों की कमजोरी व उससे होने वाला सिरदर्द दूर होते हैं व नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है।

उनके लम्बे समय तक सेवन से आईसाइट भी सुधरती है। ल्यूटीन और जियाजेशिन के अलावा एंटीआक्सीडेंट्स विटामिन ‘A’ और विटामिन ‘E’ भी आंखों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक व लाभकारी है।

यह दोनों विटामिन हानिकारक फ्री रेडिकल्स से होने वाली क्षति को रोकते हैं। विटामिन ‘A’ आंखों की दृष्टि को सामान्य बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है और इसकी कमी से नाइट ब्लाइंडनेस (रात को कम दिखना) जैसी समस्या होती है।

आंखों के अच्छे स्वास्थ्य, अच्छी दृष्टि, चश्मे से बचाव, हानिकारक ब्लू लाईट के दुष्प्रभाव जैसे-आंखों में सूखापन, थकान, धुंधली  दृष्टि, समय के पहले दृष्टि की हानि, आदि व लम्बे समय तक आईसाइट को बचाने के लिए ल्यूटीन और जियाजैंथिन जैसे वंडर नुट्रिएंट्स व विटामिन A और विटामिन E का सेवन अत्यंत ही आवश्यक है।

हमारे आर में बीटा कैरोटीन आवश्यकतानुसार विटामिन A में परिवर्तित हो जाता है जो आँखों की दृष्टि को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है।

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