क्षारीय शरीर कैसे बनाये? | How to make Alkaline Body?

रोग मुक्त जीवन की ओर आपका सार्थक कदम

जीवित रहने के लिए शरीर में क्षारीयताअम्लीयता का संतुलन

हमारे शरीर के सुचारू रूप से कार्य करने व जीवित रहने के लिए शरीर के हर हिस्से में व कोशिकाओं के आसपास क्षारीयता (ऐल्कलिनिटी) व अम्लीयता (एसिडिटी) के संतुलन की जरूरत होती है। हमारे शारीरिक द्रव्यों (रक्त, यूरीन, आदि) की ऐल्कलनिटी या एसिडिटी उनके पीएच (पॉवर ऑफ हाइड्रोजन) यानि उनमें हाइड्रोजन आयन की मात्रा द्वारा निर्धारित होती है जो 0 से 14 के पैमाने पर इस चीज़ का माप है कि कोई द्रव्य क्षारीय (ऐल्कलाइन) है या अम्लीय (एसिडिक)। 7 से जीवे का पीएच का माप एसिडिटी व 7 से ऊपर का माप ऐल्कलिनिटी दर्शाता है। पीएव का माप7 होना न्यूट्रेलिटी (सामान्य होना) दर्शाता है। शरीर में श्तास-प्रश्वास द्वारा कार्बन डायऑक्साइड बाहर निकालकर, गुर्दो (किडनियों) द्वारा पेशाब यूरीन) बनाकर, त्वचा द्वारा पसीन के रूप में व अन्य आंतरिक प्रणालियों से क्षारीयता (एल्कलिनिटी) त अम्लीयता (एसिडिटी) का संतुलन बना रहता है। बढ़ते औद्योगीकरण व प्रदूषण, ताजे फल-सब्जियों के घटते सेवन, मांसाहार, वेस्टर्न डाईट, प्रोसेस्ड व पैकेज्ड फूड और कार्बोजटेड ड्रिंक्स के बढ़ते प्रचलन, आधुनिक जीवनशैली के कारण बढ़ते तनाव और अनिद्रा- इन सबके कारण हमारे शरीर में एसिड की अधिकता (एसिडोसिस) हो सकती है। कुछ रोगों से ग्रसित होने पर या उनके उपचार के लिए ली गई दवाइयों से भी शरीर में एसिड ज्यादा बनता है। बढ़ती उम्र या कई रोगों के कारण भी गुर्दो (किडनियों) की शरीर से अनावश्यक एसिड निकाल पाने की क्षमता घट जाती है। अधिक एसिड के कारण हमारे शरीर की अच्छी कोशिकाओं का धीर-धीरे क्षय होने लगता है जिससे हमारी इम्यूनिटी घटने लगती है। यह स्थिति कैंसर और कई जानलेवा बीमारियों को निमंत्रण देती है क्योंकि शरीर में अधिक एसिड बीमारी के रोगाणुओं को पनपने के लिए अनुकूल वातावरण देता है। इस एसिडिटी को बेअसर करने और ऐल्कलाइन बने रहने के लिए शरीर को हड्डियों, दांतों व अन्य अंगों से कैल्शियम, मेग्निशियम, आदि मिनरल्स को खींच कर निकालना पड़ता है जिससे ऑस्टियोपोरोसिस, आर्थराइटिस जैसे रोग हो सकते हैं। स्वस्थ रहने के लिए शरीर का आंतरिक वातावरण ऐल्कलाइन रहना चाहिए। हमारे शरीर का pH लेवल ऐल्कलाइन यानि 7.35 से 7.45 तक होला वाहिए। आप अपने शरीर का pH लेवल सुबह उठते ही अपनी लार (सलाईवा) या पेशाब हधारीन) से pH स्ट्रिप के द्वारा माप सकते हैं। ऐल्कलाइन शरीर आंतरिक प्रणालियों को ठीक रखने में, कई रोगों से बचाव में और शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है।

हमारे आहार व शरीर में बढ़ती एसिडिटी व उसके दुष्प्रभाव

हमारे आहार में आम तौर पर चीज़, प्रोसेस्ड व रिफाईंड खाद्य पदार्थ व अनाज ज़्यादा होते हैं और ताजे फल सब्जियां कम ही शामिल होती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार एसिडिक डाइट लेते रहने से हड्डियों में मिनरल्स का जमाव घटने से उनके घनत्व (बोन मिनरल डेंसिटी) में कमी व खोखलेपन (ऑस्टियोपोरोसिस), शरीर के फैट रहित भाग (लीन बॉडी मास) की हानि. हृदय-रोग, कैंसर और उनके कारण असमय मृत्यु होने का खतरा बढ़ता है। हमारा आहार एसिडिक है या ऐल्कलाइन, यह उसके स्वाद, खट्टेपन, मिठास, आदि पर निर्भर नहीं करता बल्कि इस पर आधारित है कि उसके पावन व मेटाबॉलिज्म के बाद हमारे शरीर में अम्ल उत्पन्न होता है या क्षार। उदाहरण के तौर पर, नींबू एक खट्टा फल है पर नींबू का रस हमारे शरीर में ऐल्कलाइन प्रभाव छेड़ता है। मांस-मछली, अंडे, दूध व दूध से बने उत्पाद व कुछ अनाज की शरीर में एसिड उत्पन्न करने की प्रवृत्ति होने से ये हमारे शरीर पर काफी एसिड लोड डालते हैं। इनके अलावा सफेद-ब्रेड, सफेद-वावल, पास्ता, बिस्कुट, आदि भी शरीर में एसिडिटी बढ़ाते हैं। इसके विपरीत फल-सब्जियों के पाचन व मेटाबॉलिज्म से हमारे शरीर में ऐल्कली उत्पन्न होता है। पशुओं से प्राप्त प्रोटीन के स्थान पर पूर्णत: पौधों से प्राप्त (वीगन) प्रोटीन लेने से एसिड लोड अपेक्षाकृत घटता है।

एसिडिक आहार से बढ़ते शारीरिक एसिड लोड के कारण हमारे शरीर के पीएच को संतुलित रखने वाली बफरिंग प्रणाली को पीएच को ऐल्कलाइन बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। सबसे पहले हमारे गुर्दो पर इस समस्याजनक एसिड को बाहर निकालने का दबाव पड़ता है। एसिड बाहर निकालने के लिए शरीर को फॉस्फेट की जरूरत पड़ती है आजकल सामान्यत: ली जाने वाली डाइट से जितना एसिड बनता है, उसके मुकाबले हमा शरीर में फॉस्फेट की उपलब्धता आधी ही होती है। इस कारण जो अनावश्यक एसिड शरीर बाहर नहीं निकल पाता, उसके कई दुष्प्रभाव होते हैं। एसिड को शरीर में न्यूट्रलाईज करने । प्रक्रिया में हड्डियों व मसल्स की हानि होती है, इंसुलिन की प्रभावशीलता घटती है (जिस मसल्स पर्याप्त मात्रा में रक्त से ग्लूकोज़ नहीं ले पातीं) और मोटापे, डायबिटीज़, ह ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का खतरा बढ़ता है। न्यूट्रलाईज होने के बाद यह अनावश्य एसिड परिवर्तित रूप में शरीर की कोशिकाओं में संग्रहित हो जाता है और आंतों व खत बायकानिट (क्षार) की मात्रा घटती है। बच्चों में एसिडिक आहार के कारण शरीर में एसिड अधिकता से ग्रोथ-हॉर्मोन के स्तर घटते हैं व बच्चे सामान्य से कम हाईट के रह जाते हैं।

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