लहसुन के 19 अद्भुत फायदे हिंदी में | 19 Amazing Benefits of Garlic in hindi

क्या है लहसुन ? | What is garlic?

लहसुन सुप्रसिद्ध वनस्पति है। जिसका प्रयोग न जाने कितनी शताब्दियों से मसाले तथा औषधि के रूप में किया जा रहा है। इसकी खेती पूरे साल होती है। इसकी जड़ें असामान्य चौड़े तने वाली और चपटी होती हैं। इनमें सफेद रंग की पोथियाँ लगती हैं। प्रत्येक पोथी में 6 से 12 तक कलियां होती हैं। इन कलियों में से तीव्र गन्ध आती है। वेसे तो सभी पोधियों वाला लहसुन भोजन एवं औषधि में प्रयोग किया जाता है, परन्तु एक पोथी वाला लहसन सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। प्रत्येक कली पर कड़ा छिलका होता है जिसके भीतर सफेद, चमकदार, पारदर्शक तुरियों पाई जाती हैं। 

लहसुन (गार्लिक) की तीखी गंध व स्वाद ने इसे दुनिया भर के व्यंजनों का एक लोकप्रिय घटक बना दिया है। इसे हेल्‍दी फूड भी कहा जाता है क्योंकि इसका केवल मसालों के रूप में ही उपयोग नहीं होता, बल्कि कई तरह की बीमारियों के इलाज व उनसे बचने के लिए भी इसमें कई औषधीय गुण मौजूद हैं। 

परन्तु शुद्ध रूप से लेने के लिए जब गार्लिक को काटते हैं या चबाते हैं तो इसमें एलिन नामक लाभकारी सल्फर तत्व जलन व चुभन वाली अनुभूति देता है। एलिन गार्लिक के प्रमुख ऑर्गेनोसल्फर यौगिकों में से एक है जिसे जैविक रूप से सक्रिय माना जाता है।

मुख्यत: एलिन के कारण ही लहसुन के विभिन्‍न स्वास्थ्यकारी गुण होते हैं। एलिन की जलन व चुभन वाली अनुभूति के कारण शुद्ध रुप से गार्लिक का सेवन काफी कठिन हो जाता है। कुछ आधुनिक तकनीकों के उपयोग से गार्लिक के शुद्ध रूप से सेवन के लिए उसे सप्लीमेंट के रूप में ऐसा तैयार किया गया है जिससे गार्लिक में मौज़द एलिन से होने वाली जलन व चुभन वाली संवेदना को तो खत्म कर दिया जाता है लेकिन एलिन की मात्रा व गुण उसमें बरकरार रहते है। इससे गार्लिक का शुद्ध रूप में सेवन बिना किसी जलन व चुभने वाले तीखे स्वाद के संभव हो जाता है और उसके गुणकारी तत्व भी शरीर को मिल जाते हैं।

लहसुन के प्रकार | Types of garlic

विभिन्न क्षेत्रों के अनुरूप लहसुन के कई प्रकार हैं। जैसे कुछ लहसुन के कंद छोटे तो कुछ के बड़े, कुछ सफ़ेद रंग के तो कुछ हल्के गुलाबी रंग के और कुछ बैंगनी रंग के लहसून भी .होते हैं। आइये जानते हैं कुछ लहसुन के प्रकार उनके नाम के साथ :-

एग्रीफाउण्ड पार्वती (जी- 313)

यह किस्म पहाड़ी क्षेत्र के लिए ज्यादा उपयुक्त मानी जाती है। इसके शल्क कंद का व्यास 5 से 7 सेंटीमीटर का होता है। यह हल्का सफेद और बैंगनी मिश्रित रंग का पाया जाता है। इसके हर शल्ककंद में 10 से 15 कलियां पाई जाती हैं। इनकी कली का व्यास 1.5 से 1.8 सेंटीमीटर का होता है। जिनका वजन 4 से 4.5 ग्राम तक होता है। यह किस्म 250 से 270 दिनों में फसल तैयार कर देती है। जिससे प्रति हेक्टयर 175 से 225 क्विंटल पैदावार मिलती है।

टी- 56-4

लहसुन की इस उन्नत किस्म को काफी उपयुक्त माना जाता है। इसके शल्क कंद छोटे आकार के होते हैं और इनका रंग सफेद होता है। इसके हर शल्क कंद में 25 से 35 कलियां होती हैं। यह प्रति हेक्टयर 80 से 100 क्विंटल पैदावार प्राप्त होती है।

गोदावरी (सेलेक्सन- 2)

इस उन्नत किस्म के शल्ककंद मध्यम आकार के होते हैं। इनका व्यास 4.35 सेंटीमीटर तक होता है। यह हल्के गुलाबी और सफेद रंग के दिखाई देते हैं। हर शल्क कंद में 20 से 25 कलियां पाई जाती हैं। यह बुवाई के लगभग 140 से 145 दिन बाद फसल तैयार कर देती हैं। इससे प्रति हेक्टर 100 से 105 क्विंटल पैदावार मिल जाती है।

एग्रीफाउण्ड व्हाइट (जी- 41)

इस किस्म की शल्क कंद ठोस और त्वचा चांदी की तरह सफेद होती है। इसका गुदा क्रीम रंग का पाया जाता है। तो वहीं कलियां बड़ी पाई जाती हैं। खास बात है कि इस किस्म में बैंगनी धब्बा रोग और स्टेम फाइलियम झुलसा रोग के प्रति लड़ने की क्षमता होती है। यह लगभग 150 से 190 दिन में फसल तैयार कर देती है। इससे प्रति हेक्टयर 130 से 140 क्विंटल पैदावार प्राप्त की जा सकती है। इस किस्म की बुवाई देशभर के किसान सफलतापूर्वक करते हैं।

यमुना सफेद (जी- 1)

इस किस्म को भी देशभर में उगाया जाता है. हर शल्क कंद ठोस होते हैं। साथ ही इनकी बाहरी त्वचा सफेद होती है। इनका गूदा भी क्रीम रंग का होता है। इनका व्यास 4 से 4.5 सेंटीमीटर का होता है. हर शल्क कंद में 25 से 30 कलियां पाई जाती हैं। इनका व्यास 0.8 से 1.0 सेंटीमीटर का होता है। बता दें कि इसके भण्डारण की क्षमता काफी अच्छी मानी जाती है। यह किस्म 150 से 190 दिन में फसल तैयार कर देती है। जिससे प्रति हेक्टयर 150 से 175 क्विंटल पैदावार मिल जाती है।

भीमा पर्पल

लहसुन की यह उन्नत किस्म से लगभग 120 से 125 दिन में फसल तैयार कर देती है। इसके कंद बैंगनी रंग के दिखाई देते हैं। इससे प्रति हेक्टेयर 60 से 65 क्विंटल तक पैदावार मिल जाती है। इसको दिल्ली, यूपी, पंजाब, बिहार, हरियाणा, कर्नाटक समेत आंध्रप्रदेश के क्षेत्रों के लिए उपयुक्त माना जाता है।

भीमा ओंकार

इस किस्म के कंद मध्यम आकार के पाए जाते हैं। जो कि काफी ठोस और सफेद रंग के होते हैं। इससे लगभग 120 से 135 दिन में फसल तैयार हो जाती है। यह प्रति हेक्टेयर 80 से 135 क्विंटल तक पैदावार दे देती है। इस किस्म में थ्रिप्स कीट को सहन करने की क्षमता होती है। यह अधिकतर गुजरात, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के किसानों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

लहसुन के प्रयोग | Uses of garlic

इसका प्रयोग दमा, बहरापन, कुष्ठरोग, फेफड़ों में कफ के जमाव, नाड़ी काठिन्य, विविध प्रकार के ज्वर, पेट और आँतों के कीड़े मारने, पित्त की थेली के रोग, हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, भूख बढ़ाने, बालों के रोग, शक्ति संवर्द्धन फुलबैरी, नज़ला-ज़ुकाम, बवासीर और कफ आदि में किया जाता है।

पानी के साथ लहसुन | Garlic with water

रोजाना सुबह पानी के साथ कच्चा लहसुन खाने से आपके शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं. सुबह कच्चा लहसुन पानी के साथ लेने पर आपके शरीर को डिटॉक्स करने का बेहतरीन तरीका है. अगर आप रोजाना एक गिलास पानी के साथ कच्चा लहसुन खाते हैं तो आप कई प्रकार के कैंसर, डिप्रेशन और डायबिटीज से भी बच जाते हैं।

पुरुषों के लिए लहसुन | Garlic for men

पुरुषों को रात में लहसुन जरूर खाना चाहिए. क्योंकि लहसुन में एलीसिन नाम का पदार्थ पाया जाता है जो पुरुषों के मेल हार्मोन को ठीक रखता है. इसके अलावा लहसुन का सेवन करने से पुरुषों में इरेक्टाइल डिस्फंक्शन का खतरा भी दूर होता है. लहसुन में भारी मात्रा में विटामिन और सेलेनियम भी पाया जाता है, जिससे स्पर्म क्वालिटी बढ़ती है.

विभिन्‍न रोगों व उपचार में लहसुन के उपयोग | Use of garlic in various diseases and treatment

काली खाँसी 

लहसन की कैली आग पर भूनकर शहद में पीसें ओर रोगी को चटा दें। बच्चों को आधी मात्रा में चटाएँ। शिशुओं को लहसन की राख ज़रा-सी देनी चाहिए और माता के ही दूध के साथ यह ठीक रहती है। इससे काली खाँसी में आराम आता है। । अपामार्ग के रस में लहसन का रस मिलाकर पिलाएँ। रोगी के सीने पर नर्म हाथों से जैतून के तेल की मालिश करें। यह प्रक्रिया दो-दो घण्टे बाद दोहराते रहें। बच्चों को छिली हुई लहसन की कली तोड़कर सुंघाएँ। इससे काली खाँसी में लाभ होता है। 

आँखों की ज्योति के लिए लहसुन के फायदे  

आँखों की ज्योति कम होने लगे तो लहसन की पाँच कलियां घोट-पीसकर पचास ग्राम पानी मिलाकर उसमें शहद घोलें और पी जाएँ। दो घण्टे के बाद हल्का गर्म दूध पी लें। इससे आँखों की रोशनी तेख होगी तथा शरीर को ताकत मिलेगी और बाल भी सफेद नहीं होंगे। 

कान दर्द में लहसुन के फायदे    

लहसन का तेल थोड़ा गर्म करके कान में डालने से खुश्की भी दूर होती है और छोटा-मोटा घाव भी सूख जाता है। अगर घाव न हो तो लहसन और अदरक का रस मिलाकर तीन-तीन बूँद कानों में डाल सकते हैं। एक ही कान में दर्द हो तो दो बूँद डालकर थोड़ी देर बाद रूई की बत्ती से कान साफ करें। अदरक और लहसन की एक-एक बूँद मिलाकर ही दो बूँद डालें। कान के दर्द में आराम आएगा। 

कान की फुँसी में लहसुन के फायदे    

लहसन के रस में चार गुना पानी मिलाकर उन दोनों के बराबर ग्लिसरीन घोल लें। फिर इस प्रिश्रण की 2-3 बूँदें कान में डालें। फुँसी को दबाने और सुखाने में यह बहुत लाभ करता है। 

कान के मवाद में लहसुन के फायदे    

तिल के तेल में लहसन की छिली हुई कलियाँ काटकर आग पर पकाएँ। कलियाँ लाल होने लगें तो तेल छान लें। इस तेल की दो-दो या तीन-तीन बूँद कान में टपकाएँ। दो घण्टे बाद रूई से कान साफ करके दोबारा तेल की बूँद डाल दें . और रूई से कान बन्द करके सो जाएँ। दो-तीन दिनों में पीव या मवाद आना बन्द हो जाएगा।

गला बैठने पर लहसुन का उपयोग

पानी में लहसन का रस डालकर गरारे कीजिए, आवाज़ खुल जाएगी और गले में दर्द भी नहीं रहेगा। गरारों से चैन न मिले तो लहसन की दो-तीन कलियाँ छील-काटकर सिरके में दुबोकर चबाएँ। ऐसा करने से गला खुल जाएगा। 

छाती के दर्द में लहसुन के फायदे    

लहसन का अर्क निकालिए और उसमें नमक मिलाकर एक चम्मच पिला दीजिए। छाती के दर्द में आराम आएगा, इसके साथ ही सीने पर लेप भी कीजिए और इसके लिए लहसन का रस वैसलीन में मिला लीजिए। . 

जुकाम में लहसुन के फायदे    

बीस ग्राम सोंठ, दस ग्राम काली मिर्च, पाँच सौ तुलसीदल, आधा लहसन, इन सबको पींसकर मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करें। नज़ला-ज़ुकाम जड़ से जाता रहेगा। इसका सेवन रात को करें ताकि सुबह तक आराम हो जाए। 

थकान में लहसुन के फायदे    

चाहे आप बीस कोस पैदल चलकर आ रहे हों और रोमरोम थकान से चूर हो गया हो। आराम से बैठकर लहसन की एक गॉाँठ छीलकर खा जाएं। कुछ ही देर में थकान उतर जाएगी। 

पंसली चलना

अबोध बच्चों को इससे बड़ी तकलीफ होती है। पाँचसात लहसन की गाँठें छीलकर उनकी कलियों की माला, गजरे और पाज़ेब बनाएँ। इन्हें रोगी के गले, कलाइयों और पैरों में पहना दें पसली चलना रुक जाएगी और बिलबिलाता हुआ जच्या मुस्कराने लगेगा। 

फोड़े-फुँसी में लहसुन के फायदे    

लहसन पीसकर फोड़े या फुँसी पर बाँध दीजिए । घाव के कीड़े मर जाएँगे। स्पिरिट में लहसन का रस मिलाकर फुँसी पर लगाने से भी कीड़े मर जाएँगे। जब-जब लहसनिया स्पिरिट लगाएँ पहले उसी से घाव साफ कर लें और बाद में दूसरी फुरेरी से लगा दें। कुछ दिनों में घाव भरकर साफ त्वचा निकल आएगी। 

पेशाब में रुकावट

लहसन का रस मिलाकर चाय पीजिए। इससे पेशाब की रुकावट दूर होगी। | लहसन की पुल्टिस बनाकर मूत्रेद्विंय पर बाँधने से भी मूत्राशय खुल जाता है।.. पेडू पर लहसन की कलियाँ पीसकर बाँधने से भी पेशाब की रुकावट खुल जाती है। 

पेट का फूलना 

बच्चे का दर्द के मारे पेट फूल रहा हो तो लहसन के रस में थोड़ा घी और नमक मिलाकर उसके पेट पर मुलायम हाथों से मल दें। लहसन की गंध में खूबी यह है कि वह त्वचा में प्रवेश करके मनुष्य के रोम-रोम में फैलकर तकलीफ की जड़ पर बार करती है। लहसन, घी और नमक का मिश्रण पोटली में बाँधकर भी बच्चे के पेट को टकोरा जा सकता है। इससे बड़ों की मालिश भी की जा सकती है और उन्हें लहसन की चटनी रिलाई भी जा सकती है। अपच के कारण फेट फूल रहा हो तो खाली लहसन का रस ही रामबाण की तरह काम करेगा। 

भूख न लगना

एक लहसन पूरा छीलकर, थोड़े पुदीन के पत्ते, नमक और काली मिर्च के साथ पीसें और इसी में नीबू निचोड़कर स्वादिष्ट चटनी चाट लें। खुलकर भूख लगेगी। 

मधुमेह में लहसुन के फायदे    

त्रिफले का चूर्ण बना लें और दो रत्ती मुँह में रखकर लहसन की एक-एक करके तीन कलियों चबा-चबाकर खाए। लाभ होगा। 

बेहोशी में लहसुन के फायदे    

बेहोश आदमी की नाक में लहसन के रस की दो-दो बूँद टपका दें। कुछ ही देर में वह होश में आ जाएगा। 

मोच में लहसुन के फायदे    

लहसन के रस में नमक मिलाकर मोच वाली जगह पर लेप कीजिए। दो दिन सुबह-शाम इसकी मालिश नर्म हाथों से कीजिए। अगर मोच से त्वचा के भीतर ज्यादा टूट-फूट हुईं होगी तो हफ्ताभर की मालिश से ठीक हो जाएगी। 

उबकाई में लहसुन के फायदे    

ताज़ा या सूखा लहसन लेकर उसकी एक कली छीलकर खूब चबाकर निगल जाएँ। दूसरी कली खाते ही हाज़मे की डकार आ जाएगी। उबकाई आनी बंद हो जाएगी। 

गुहेरी में लहसुन के फायदे    

चार कलियां लहसन की पीसकर दो-तीन बूँद रस निकाल लें और उसमें कपूर घोलकर गुहेरी पर दिन में तीन-चार बार लगाएँ। शाम तक गुहेरी बैठ जाएगी। यह दवा आंख को पुतली से दूर रहे। 

अन्य भाषाओं में लहसुन के नाम | Names of garlic in other languages

संस्कृत – रसोन, उग्रगंध, महौषध 

अंग्रेजी – गार्लिकरूट 

हिदी – लहसुन

लैटिन – एलियम सेटाइवम्

Leave a Comment

Share via