शरीर के लिए कितना कार्बोहाइड्रेट आवश्यक है?

ऊर्जा प्रदान करने वाले पोषक तत्वों में कार्बोहाइड्रेट की शरीर को सबसे अधिक मात्रा में आवश्यकता होती है। विभिन्न शारीरिक कार्यों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत कार्बोहाइड्रेट ही होते हैं। आहार में शामिल कार्बोहाइड्रेट भोजन करने के बाद, पाचन तंत्र में विभिन्न एंजाइमों के प्रभाव द्वारा अपनी सरलतम अवस्था यानी ग्लूकोज़ में परिवर्तित हो जाते हैं। यह ग्लूकोज़ शरीर द्वारा अवशोषण के बाद विभिन्न कोशिकाओं में ले जाया जाता है जहां इसका रासायनिक प्रक्रियाओं और ऊर्जा के उत्पादन में उपयोग होता है। 1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट 4 किलो कैलोरी ऊर्जा प्रदान करता है। तो आइये समझते हैं कि शरीर के लिए कितना कार्बोहाइड्रेट आवश्यक है?

Good & Bad Carbohydrate

कार्बोहाइड्रेट दो प्रकार के होते हैं –

अच्छे कार्बोहाइड्रेट व बुरे कार्बोहाइड्रेट

अच्छे कार्बोहाइड्रेट फायबर युक्त होते हैं और प्रोसेस्ड नहीं होते। इनमें कार्बोहाइड्रेट कम मात्रा में और विटामिन्स और मिनरल्स जैसे पोषक तत्व अधिकता में होते हैं। ऐसे कार्बोहाइड्रेट्स शरीर में धीरे-धीरे अवशोषित होते हैं और रक्त शर्करा के स्तर को तेजी से नहीं बढ़ाते। ये शरीर में कॉलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने और कब्ज़ से बचाव में भी मदद करते हैं।

स्रोतः- साबुत अनाज, क्विनोआ प्रेटीन और फायबर युक्त अनाज), साबुत गेहूँ, फलियां व दालें, सेम, मटर, फल-सब्जियां, योकर युक्त गेहूँ का आटा।

बुरे कार्बोहाइड्रेट रिफाइंड और प्रोसेस्ड होते हैं व बहुत कम मात्रा में फायबर से युक्त होते हैं। इनमें कार्बोहाइड्रेट्स अधिकता में और अन्य पोषक तत्व बहुत कम होते हैं। ये कार्बोहाइड्रेट पाचन के बाद तेजी से अवशोषित हो जाते हैं इसलिए इन्हें खाने के बाद ब्लड-शुगर में तेजी से वृद्धि होती है। हमें इन्हें खाने से बचना चाहिए और डायबिटीज़ के रोगियों को तो दृढ़ता से इनका सेवन नहीं करना चाहिए। डायबिटीज, पालीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, कब्ज, हृदय रोग आदि कई स्वास्थ्य समस्याओं में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन प्रतिबंधित है। 

स्रोतः- शक्कर, गन्ने का रस, शक्कर युक्त कोल्ड ड्रिंक, बिना चोकर के गेहूँ का आटा, सफेद चावल, सफेद ब्रेड, जैम, जेली, बिस्कुट, कैंडी व डिब्बा-बंद जूस।

Glycemic Index / ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई)

ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक पैमाना है जो यह दर्शाता है कि विभिन्न कार्बोहाइड्रेट खाने के बाद, पचने और शरीर द्वारा इस्तेमाल किये जाने के लिए कितना समय लेते हैं। प्रत्येक कार्बोहाइड्रेट द्वारा पाचन के बाद रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाने की गति को यह एक संख्या द्वारा दर्शाता है। किसी कार्बोहाइड्रेट का जितना उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, उतना जल्दी यह कार्बोहाइड्रेट शरीर में पच जाता है व रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ाता है।

सामान्यत: यह संख्या 50 और 100 के बीच होती है (100 एक स्टैण्डर्ड संख्या है जो शुद्ध ग्लूकोज़ के ग्लाइसेमिक इंडेक्स के बराबर है)। कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थ उनके ग्लाइसेमिक इंडेक्स स्कोर के आधार पर चुने जाने चाहिए। कम जीआई स्कोर वाले खाद्य पदार्थों में अक्सर अधिक फाइबर होता है और हमें आहार में इन्हें ही चुनना चाहिए।

चूंकि कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध और कम महंगे होते हैं, इसलिए विकासशील देशों में, दैनिक आहार में कार्बोहाइड्रेट ही सबसे अधिक मात्रा में खाया जाने वाला मुख्य पोषक तत्व है। शहरीकरण, सुगम उपलब्धता और खाना पकाने के लिए समय की कमी, आदि के कारण ज़्यादातर लोग ‘खाने के लिए पहले से तैयार रेडी-टू-ईट) और जंक फूड खाना पंसद करते हैं जबकि यह ज़्यादातर बुरे कार्बोहाइड्रेट से भरपूर और उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले होते हैं।

सभी खाद्य-सामग्री बनाने वाली कंपनियों द्वारा बिस्कुट, ब्रेड, पास्ता, नूडल्स, आदि प्रोसेस्ड और डिब्बा-बंद खाद्य-पदार्थों के पैक पर ग्लाइसेमिक इंडेक्स को अनिवार्यत: उल्लेखित करने का नियम बनाना चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को खाद्य-सामग्री के हर उत्पाद के बारे में यह महत्वपूर्ण जानकारी मिल सके। 

कुछ देशों में अनाज के रूप में केवल साबुत गेहूँ का आटा ही खाया जाता है। गेहूँ में ग्लूटेन नामक एक लचीला व चिपचिपा प्रोटीन होता है जो आंतों में चिपक जाता है इसलिए पेट के मोटापे (सेंटलू ओबेसिटी) के विभिन्न कारणों में यह भी शामिल है। गेहूं के आटे से बेहतर विकल्प के रूप में हमें विभिन्न प्रकार के अनाज के मिश्रित (मल्टी-ग्रेन) आटे का सेवन करना चाहिए ताकि कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ हमें आहार से सभी महत्वपूर्ण पोषक तत्व प्राप्त हो सके दूसरे विकल्प के रूप में चोकर सहित गेहूं का आटा भी उपयोग में लाया जा सकता है। विश्व में सबसे अधिक मात्रा में सेवन किये जाने वाले आलू में भी कार्बोहाइड्रेट की उच्च मात्रा (17g/100gm) होती है।

आलू का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत अधिक होता है जो डायबिटीज़ के रोगियों और वज़न घटाना चाहने वाले लोगों के लिए बहुत अनुपयुक्त है।

कार्बोहाइड्रेट के अत्यधिक सेवन का सबसे गंभीर परिणाम पेट का मोटापा (सेंट्रल ओबेसिटी) होता है जिससे डायबिटीज व हृदय-रोग जैसी बीमारियां हो सकती हैं। भारत में अधिकतरलोग सेंट्रल ओबेसिटी से ग्रसित हैं। यही कारण है कि भारत दुनिया की डायबिटिक राजधानी बन गया है।

शक्कर के अधिक सेवन से भी पेट का मोटापा बढ़ता है। शक्कर केवल कैलोरी देती है व ज्यादा सेवन करने से फैट के रूप में शरीर में जमा हो जाती है। WHO के नए निर्देशों के अनुसार मेटाबोलिक सिंड्रोम से बचाव के लिए हम दैनिक आहार में कुल कैलोरी का 5% तक ही शक्कर के रूप में ले सकते हैं। इस मात्रा में दिन भर में लिए जाने वाले सभी प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ भी शामिल हैं। इसलिए डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ खरीदने से पहले, उसमें प्रयुक्त शक्कर की मात्रा जानने के लिए हर पैक पर दी गई पोषण संबंधी जानकारी को पढ़ना आवश्यक है। निर्देशित मात्रा से अधिक शक्कर लेने से कई गंभीर रोगों का जोखिम बढ़ जाता है।

शरीर के लिए कितना कार्बोहाइड्रेट आवश्यक है?

कार्बोहाइड्रेट शरीर में ऊर्जा का मुख्य स्रोत है इसलिए कुल कैलोरी का लगभग 65% भाग कार्बोहाइड्रेट से मिलना चाहिए। उदाहरण के लिए, दैनिक आहार में कुल 1800 किलो कैलोरी लेने वाले स्वस्थ व्यक्ति को दिन भर में लगभग 292 ग्राम कार्बोहाइड्रेट का सेवन करना चाहिए। दूसरी ओर, वज़न घटाने के लिए 1400 किलो कैलोरी वाली दैनिक डाइट लेने वाले व्यक्ति को दिन भर में लगभग 227 ग्राम कार्बोहाइड्रेट का सेवन करना चाहिए। 

sweet corn

हमें अपने शरीर की दैनिक आवश्यकता के अनुसार ही कार्बोहाइड्रेट का सेवन करना चाहिए। इनमें भी अच्छे कार्बोहाइड्रेट का अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए क्योंकि इनके कई स्वास्थ्य लाभ हैं और बुरे कार्बोहाइड्रेट का सेवन सीमित रखना चाहिए। हमें एक बार के भोजन में कार्बोहाइड्रेट को अत्यधिक मात्रा में नहीं खाना चाहिए। रक्त शर्करा के स्तर को संतुलित रखने के लिये दिन भर के भोजन में शामिल कार्बोहाइड्रेट की कुल मात्रा को 4 भागों में विभाजित कर इसका सेवन करना चाहिए। रात के खाने में कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम से कम करना चाहिए।

तो दोस्तों मुझे यकीन है कार्बोहाइड्रेट के बारे में यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी।

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