क्यों होते हैं हम बीमार?

आइये हम समझते हैं कि क्यों होते हैं हम बीमार? हमारे खान पान और हमारी दैनिक गतिविधियां ही हमारे शरीर को अच्छा व खराब रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आज की भाग दौड़ भरी जीवन शैली और भौतिक सुख पाने की चाह तो हमारे जीवन को तलासे भार दिया है। पहले पहल तो ज्यादा सोचने, कम सोने, असंतुलित खानपान, एक ही समय में कई काम करने की कोशिश या बहुत जल्द बहुत ज्यादा सफल होने का तनाव, अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का तनाव होने लगता है।

तनाव, चिंता, डर व डिप्रेशन

धीर-धीरे यह चिंता होने लगती है कि मैं कर पाऊंगा पाऊगी या नहीं। धीरे-धीरे लक्ष्य के करीब आते-आते यह डर लगने लगता है कि मैं नहीं कर पा रहा रही हूं। पूरी कोशिश या मेहनत से भी बात बनती न देखकर लोग अंतत: डिप्रेशन से ग्रसित हो जाते हैं।

तनाव, चिंता, डरडिप्रेशन इन्ही कारणों से हृदय रोग, उत्त-रक्तचाप, डायबिटीज़, मूड डिसआर्डर और मानसिक असंतुलन जैसी कई बीमारियां अपने पांव पसार रही है। लंबे समय तक उदासी, काग में मज ज लगना, अनिद्रा, भूख घटजा, आत्मविश्वास की कमी, आदि मानसिक चिंता व डिप्रेशन के लक्षण हैं।

किसी प्रिय व्यक्ति को खो देना, कोई गंभीर बीमारी, आर्थिक व सामाजिक परेशानियां, जिदंगी में कोई अप्रिय बदलाव, बेरोजगारी, निम्न सामाजिक स्तर और मानसिक, भावनात्मक व शारीरिक शोषण भी तजाव, चिंता, डर व डिप्रेशन के कारण बन सकते हैं।

इनसे ग्रसित लोगों को अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, शारीरिक अक्षमता, आदि शारीरिक तकलीफें और पारिवारिक एवं सामाजिक परेशानियां हो जाती हैं। तनावग्रस्त व्यक्तियों का मन नौकरी या व्यवसाय में नहीं लगता। महिलाओं में डिप्रेशन की समस्या पुरुषों से अधिक होती है।  

डिप्रेशन से बचाव के उपाय

योग और व्यायाम जो अपने दैनिक जीवन में शामिल करें

कई देशों में हुई रिसों ने सिद्ध किया है कि संतुलित पोषण के अलावा नियमित व्यायाम, योग, मेडिटेशन (ध्यान) व पोषक तत्वों से युक्त पदार्थों का उपयोग तनाव रहित रहने और उच्च रक्तचाप, तनाव, चिंता व डिप्रेशन जैसी जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव में एक निर्णायक भूमिका निभाता है।

‘जर्नल ऑफ अल्टरनेटिव एंड कॉम्प्लीमेंटरी मेडिसिन’ में प्रकाशित एक शोध के अनुसार ब्रेन में गामा-एमिनोबुटायरिक एसिड (जीएबीए) के स्तरों का डिप्रेशन और चिंता संबंधी अन्य विकारों से सीधा संबंध होता है और योग करने से जीएबीए कम होता है। नियमित व्यायाम से आप स्वस्थ तो रहते ही हैं, साथ ही चिंता, डिप्रेशन और तनाव भी घटते हैं। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने पर खुशी प्रदान करने वाले एंडोर्फिन हॉर्मोन की मात्रा में वृद्धि तनाव, चिंता, डर व डिप्रेशन होती है और स्ट्रेस होमोन (कार्टिसोला) के स्तर में तभी आती है जिससे शरीर तनावमुक्त हो जाता है।

योग व व्यायाम मन को शांत करते है और शारीरिक प्रक्रियाओं को मजबूत बनाते हैं। इनसे तनाव वाली मसल्स को आराम मिलता है और अच्छी नींद आती है जिससे तनाव घटता है। डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, क्रोध, भय, असुरक्षा व डिप्रेशन और पाकिन्सन, सिजोफ्रेनिया जैसे रोगों पर नियमित योगाभ्यास से सकारात्मक असर होता है।

नियमित व्यायाम से मानसिक तनाव घटता है, भूलने की बीमारियों-डिमेंशिया व अल्जाइमर की रोकथाम में मदद मिलती है और मानसिक कार्यक्षमता भी बढ़ती है। मन शांत रखने के लिए सर्वांगासन, हलासन, भुजंगासन, जानुशिरासन, त्रिकोणासन तथा उष्टासन, आदि यौगिक क्रियाएं उपयोगी हैं। जाड़ी शोधन एवं उज्जायी प्राणायाम का नियमित अभ्यास तन व मन दोनों के लिए लाभकारी है।

योग का नियमित अभ्यास स्मरणशक्ति बढ़ाता है और रक्त-संवार एवं पाचन सुधारता है। नसों त मसल्स में पर्याप्त खिंचाव उत्पन्न करने के अलावा योग से गस्तिष्क को शुद्ध रक्त मिलता है। इसके लिए सूर्य नमस्कार, शीर्षासन, पश्मिोत्तानासन, उष्टासन, अर्धमत्स्येन्द्र आसज, आदि करने चाहिए।

योग और व्यायाग के अलावा मेडिटेशन या ध्यान भी तलाव, चिंता व डिप्रेशन दूर करने में  बहुत मददगार है। मेडिटेशन से हम अपने मन को चेतना की एक विशेष अवस्था में लाते हैं जिससे जागरुकता, एकाग्रता, फोकरा और सतर्कता बढ़ती है।

वैज्ञानिक शोधों से पुष्टि हुई है कि रोज़ाना मेडिटेशन करने से इम्यूनिटी व स्वास्थ्य बेहतर रहते हैं और याददाश्त बढ़ती है। मेडिटेशन गन को शान्ति देता है; विता और ताजाव बढ़ाने वाले केमिकल्स के स्तर को घटाता है, डर, आक्रामकता और गुस्सा जैसी लकारात्मक भावनाओं को कम करता है और भावनात्मक संतुलन और शारीरिक लवीलापन बढ़ाता है।

मेडिटेशन से आत्मविश्वास, सकारात्मक सोव व सहनशीलता बढ़ती है। गेडिटेशज पर की गई कुछ इंटरनेशनल रिसर्चों में यह सामने आया है कि इससे न सिर्फ उठा के साथ दिमाग के क्षीण होने संबंधी क्रियाएं धीमी पड़ती है बल्कि यह दिमाग में कई सकारात्मक बदलाव भी लाता है और दिमागी कार्यप्रणाली में किए गए अच्छे बदलाव लंबे समय तक रहते हैं।

मेडिटेशन की कई विधियां हैं जिनमें कुछ विधियों का उपयोग आसानी से किया जा सकता है।

एकाग्रित ध्यान – किसी शांत जगह में बैठकर किसी एक चीज़ पर 15 मिनट तक अपना ध्यान केन्द्रित कीजिये। आप सिर्फ अपनी सांसों पर, पक्षियों की आवाज़ पर या किसी एक मंत्र या एक शब्द को बार-बार दोहराकर उस पर अपना ध्यान केन्द्रित कर सकते हैं।

माइंडफुलनेस ध्यान – किसी शांत जगह में बैठे व मन में कुछ भी न सोचें। अपने शरीर को ढीला छोड़ें व उसमें कंपन होने दें। महसूस करें कि यह ऊर्जा आपके पांवों से ऊपर की ओर बह रही है। 20-25 मिनट तक इस प्रक्रिया को करने से आपका ध्यान बाहरी चीजों से हटकर सिर्फ एक चीज़ पर केन्द्रित हो जाएगा।

सही न्यूट्रीशन को अपने आहार में शामिल करें

तनाव, विता, डर व डिप्रेशन से बचाव में न्यूट्रीशन का योगदान संतुलित व पोषक तत्वों से भरपूर आहार भी तनाव, चिंता व डिप्रेशन दूर करने और मानसिक शान्ति प्रदान करने में सहायक है। वैज्ञानिकों के अनुसार कई खाद्य पदार्थ व विशिष्ट पोषक तत्व (वंडर न्यूट्रीएंटस) डिप्रेशन व चिंता से लड़ने में मदद करते हैं और कुर  ऐसे रसायनों के स्तर को घटाते हैं जो डर के भाव के लिये जिम्मेदार हैं।

ओमेगा 3 पोषक तत्वों का उपयोग ब्रेन में स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण के लिये होता है और डिप्रेशन के खतरेको कम करता है।

डीएचए का सेवन ब्रेन को विभिन्न रसायनों के उपयोग हेतु प्रेरित करता है और एक अच्छा व प्राकृतिक एंटी डिप्रेसेन्ट है।

प्रोटीन – पिञ्जाइलएलालाईन, टायरोसिन, थियोनिज त । हिस्टिडीज, आदि एमिनो एसिड्स मूड सुधारते हैं व सर्तकता बढ़ाते हैं। ये ब्रेल को एंटी डिप्रेसेंट हॉौन व हिस्टामिन बनाने के लिये उत्प्रेरित करते हैं और तनाव व चिंता दूर करने में भी मददगार हैं।

विटामिन्स-मिनरल्स – विटामिन्स B व C की कमी से शरीर में लजात सहन करने की क्षमता घटती है व डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, थकाज जैसे लक्षाण बढ़ते हैं। विटामिन B समूह व खासकर फोलिक एसिड, विटामिन C और मेग्जीशिराम की आपूर्ति से तनाव पैदा करने वाले हॉर्मोज घटते हैं, मूड और एनर्जी सुधरते हैं और तनाव, विता व डिप्रेशन दूर करने में मदद मिलती है। आयरन, मैग्नीश्या, पोटेशियम व जिंक जैसे मिनरल्स गानसिक स्वास्थ्य के लिये ज़रूरी होते हैं।

ताजे फल-सब्जियां, जट्स व वंडर न्यूट्रीएंटस – विटामिन C से समृद्ध संतरे शरीर को तनाव से बचाते हैं। संतरे का ज्यूस पीने से डोपामिन नामक रसायन उत्पन्न होता है जो तनाव व चिंता घटाता है। एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर ब्लूबेरी व स्पिनेत तनाव पैदा करने ताले कार्टिसोल नामक रसायत का मुकाबला करते है और तनाव से मुक्ति दिलाते हैं। केला विटामिन, फाइबर, पोटेशियम आयरन व प्रोटीन का अच्छा स्रोत है और थकान दूर कर ऊर्जा देता है व मूड सुधारता है। फोलिक एसिड व प्रोटीन से युक्त ब्रेन फूड अखरोट एक प्राकृतिक एंटीडिप्रेसेंट है। ग्रीन टी में L थियाजिन नाम का प्रोटीन होता है जो ब्रेन को रिलेक्स करता है व तनाव और विंता दूर करता है। डार्क चॉकलेट में गामा एमिनो ब्यूटायरिक एसिड जामक तत्व चिंता दूर करने में लाभदायक है।

साबुत अनाज – साबुत अनाज अच्छे कार्बोहाइड्रेट्स का स्त्रोत हैं। ये सिरोटोनिन के उत्पादन को बढ़ाते हैं और व्यक्ति को तनाव मुक्त, शांत व प्रसन्नचित्त रखते हैं।

प्रोबॉयोटिक तनाव, विंता व डिप्रेशन में हमारे शरीर में सामान्यत: पाये जाने वाले मित्र बैक्टीरिया (प्रोबॉयोटिक्स) की संख्या घट जाती है। लेक्टोबेसिलस एसिडोफिलस व लेक्टोबेसिलस रेमनोसस जैसे प्रोबॉयोटिक सप्लीमेंट ब्रेन की तलाव व चिंता से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं।

मानसिक तनाव दूर करने के अन्य उपाय: संगीत सुनें, दोस्तों और परिवार के साथ समय बितायें, खुलकर हंसें, डांस करें, सही लाइफस्टाइल चुनें, रोजाना 6000 कदम चलें और 250 सीढ़ियां चढ़े, ज्यादा न सोवें। इस तरह योग, व्यायाम, ध्यान और उचित पोषण लेकर व खुश रहकर हम खुद को तनाव व विंता से मुक्त रख सकते है।

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