पौधों से प्राप्त दूध और उनके फायदे | Milk from plants and their benefits

दूध प्रकृति से प्राप्त एक ऐसा वरदान है जिसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं। सदियों से दूध एक पौष्टिक, स्वास्थ्यकारी पेय के रूप में लिया जाता रहा है। जहां एक तरफ दूध के सेवन के बहुत फायदे है, वहीं दूसरी ओर, दूध से हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कुछ प्रतिकूल प्रभाव भी सिद्ध हुए हैं। पशुओं से प्राप्त दूध कई तरीकों से हमारे स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। पशुओं के दूध के सेवन से गैस, बदहजमी, एलर्जी व लैक्टोज इनटॉलरेंस से पेट दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। पशुओं के दूध में मौजूद हार्मोन के दुष्प्रभाव, अत्यधिक फैट व कैलोरीज से बढ़ता मोटापा व कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के उच्च स्तर, बीमार पशुओं के दूध में हानिकारक जीवाणु या एंटीबायोटिक दवाओं का होना, आदि समस्याएं हो सकती हैं। विभिन्न हेल्थ फूड्स से होने वाले स्वास्थ्य लाभों को देखते हुए वैज्ञानिक निरंतर रूप से परंपरागत हेल्थ फूड्स के स्वास्थ्यकारी विकल्प तलाश रहें हैं। इसी दिशा में पशुओं से प्राप्त दूध के विकल्प के रूप में पौधों से प्राप्त दूध और उनके फायदे एक महत्वपूर्ण खोज है। पौधों से प्राप्त दूध के स्वास्थ्य लाभों को देखते हुए इसकी मांग व खपत तेजी से बढ़ रही है और यह गाय-भैंस के दूध के विकल्प के रूप में स्थापित होता जा रहा है। पौधों से प्राप्त दूध का बाजार अभी करीब 2100 करोड़ सालाना का है और तेजी से बढ़ रहा है। पौधों से प्राप्त दूध गाय व भैंस के दूध की तुलना में बेहतर होता है क्योंकि यह लैक्टोज, कोलेस्ट्रॉल, कृत्रिम हार्मोन, फैटी एसिड्स व एंटीजन से मुक्त होता है और आसानी से पचता है। पौधों से प्राप्त ट्रूध में गाय व भैंस के दूध की तुलना में बहुत कम फैट व कैलोरी होती है। यही नहीं, पौधों से प्राप्त द्रूध प्रोटीन, विटामिन्स, मिनरल्स, फायबर, एंटीऑक्सीडेंट्स व कुछ स्वास्थ्य के लिए लाभकारी एक्टिव तत्वों से भी परिपरर्ण होता है। इसलिए ज्यादातर पौधों से प्राप्त द्रूध को हृदय रोग या लैक्टोज इनटेलरेंस से पीड़ित लोगों को दिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त गाय भैंस से प्राप्त द्रध एसिडिक होता है जबकि नट्स व अन्य पौधों से प्राप्त ट्रूध ऐल्कलाइन होता है व शरीर को एसिड से होने वाले दुष्प्रभावों से मुक्त रखता है। हमें इस तथ्य का मान करना चाहिए कि गाय का दूध उसके बछड़े के लिए होता है, मनुष्यों के लिए नहीं।

पौधों से प्राप्त दूध को पांच श्रेणियों में बांटा जा सकता है – 

1. अनाज से प्राप्त दूध – ओट्स (जरई), चावल, कॉर्न (मक्का), आदि से प्राप्त टूध।  
2. फलियों से प्राप्त दूध -सोयाबीन, मूंगफली, चावल, आदि से प्राप्त दूध।
३. नट्स से प्राप्त दूध – कोकोनट (नारियल), बादाम (आलमंड), हेजलनट, पिस्ते, अखरोट (वॉलनट), आदि से प्राप्त दुध।
4. बीजों से प्राप्त दूध – तिल, अलसी, हेम्प, सूरजमुखी, आदि के बीजों से प्राप्त दूध। 
5. अन्य पौधों से प्राप्त दूध -क्विनोआ, चौलाई, आदि से प्राप्त दूध।
पौधों (मुख्यतः नट्स) से प्राप्त दूध होने वाले फायदे
सोयाबीन का दूध
(सोया मिल्क)
ह्रदय स्वस्थ रखे, हड्डियों को भुरभुरा होने से रोके, कैंसर रोधी।
मूंगफली का दूध
(पीनट मिल्क)
ह्रदय रोगों में फायदेमंद, एंटीऑक्सीडेंट, स्ट्रोक से बचाये, सूजन रोधी।
ओट का दूध
(ओट मिल्क)
पाचन सुधारे, कोलेस्ट्रॉल कम करे।
चावल का दूध
(राइस मिल्क)
कोलेस्ट्रॉल कम करे, रक्त शर्करा व ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखे।
बादाम का दूध
(आलमंड मिल्क)
लैक्टोज इंटॉलरेंट लोगों के लिए उपयोगी, कोलेस्ट्रॉल कम करे।
नारियल का दूध
(कोकोनट मिल्क)
जीवाणु रोधी, इम्युनिटी बढ़ाये, रक्त वाहिनियां लचीली रखे, त्वचा को पोषण दे, असमय बुढ़ापे से बचाये, अच्छा कोलेस्ट्रॉल बढ़ाये, बुरा कोलेस्ट्रॉल घटाए।
काजू का दूध
(केश्यू मिल्क)
ह्रदय व पाचन के लिए फायदेमंद
अखरोट का दूध सूजन रोधी, कैंसर रोधी और ह्रदय रोग से बचाये

स्वास्थ्य के लिए इनके फायदों को ध्यान में रखते हुए, विशेषत: सोयाबीन व बादाम से प्राप्त दूध, सभी प्रकार के लोगों के लिए पशुओं से प्राप्त दूध के बेहतर विकल्प है। पौधों से प्राप्त होने वाले ये सभी मिल्क न सिर्फ पौष्टिक और शुद्ध होते हैं बल्कि बनाने में भरी बहुत आसान हैं। घर पर ही इन को तैयार करने की विधियां इस प्रकार हैं – 

आल्मन्ड मिल्क (बादाम का दूध) 

सामग्री : बादाम – 1/4 कप, पाली – 1 कप 

विधि

  • बादाम को रातभर या कम से कम 4 घंटे तक पानी में भिगोएं।
  • भीगी हुई बादाम को पानी से निकाल कर ब्लेंडर मे डाले और 1 कप पानी मिलाकर ब्लेंड करें एवं इसे छान लें।
  • स्वाद के लिए इसमें खजूर, 1/4 चम्मच सिनेमन या फिर 1/4 चम्मच वनीला एक्सट्रेक्ट भी मिला सकते हैं। | 

फ्रेश कोकोनट मिल्क (नारियल का दूध) 

कोकोनट मिल्क फायबर व आयरन से भरपुर होता है। कोकोनट मिल्क लैक्टोज़ रहित होता है जिससे लैक्टोज़ इनटॉलरेंस जैसी समस्या वाले लोगों के लिए यह उत्तम है। न्यूट्रीशिनस्ट्स के अनुसार काकोजट में पाए जाने वाले फैटी एसिड्स हृदय शेग के खतरे को कम करते हैं। 

सामग्री: 3 कप कसा हुआ नारियल, 3 कप पानी है

विधि: 

  • कसे हुए नारियल को एक कप पानी के साथ मिक्सर में बारीक पीस लें।
  • एक साफ मलमल के कपड़े से इसे छान लें। 
  • इस तरह गाढ़ा नारियल का दूध तैयार है। यह नारियल के दूध का पहला एक्सट्रेक्ट है।
  • कपड़े में बचे हुए नारियल को फिर एक कप पानी के साथ मिक्सर में पीस लें। 
  • इसे फिर से कपड़े में डालकर दूसरे बर्तन में छान लें है। यह पतला नारियल का दूध है। इसे दूसरा एक्सट्रेक्ट कहते हैं। 
  • इससे भी पतला नारियल का दूध तैयार करने के लिए कपड़े में बचे हुए नारियल को फिर से एक कप पानी के साथ मिक्सर में पीस लें। 
  • अब इसे कपड़े में डालकर अलग बर्तन में छानें। यह तीसरा एक्सट्रेक्ट है। 
  • इसे फ्रेश इस्तेमाल करें या फ्रिज में रखें। 

यह तीनों एक्सट्रेक्ट कोकोनट मिल्क ही हैं। प्रथम एक्सट्रेक्ट गाढ़ा होता है, दूसरे और तीसरे एक्सट्रेक्ट पतले होते हैं। 

राइस मिल्क (चावल का दूध)

राइस मिल्क लेक्टोज इनटॉलरेंस व सोया और नट्स की एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए एक अच्छा विकल्प है। इसमें दूसरे मिल्क के विकल्पों की तुलना में उच्च मात्रा में मैंगनीज व सेलेनियम जैसे मिनरल्स होते हैं जो शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट्स हैं एवं सक्रंमणों से लड़ने और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करने के लिए सिद्ध हैं। राइस मिल्क में कम मात्रा में फैट होता है व यह कोलेस्ट्रॉल रहित होता है। यह गाय के दूध में मौजूद सभी विटामिन्स व मिनरल्स जैसे कैल्शियम, विटीमिन ‘ए’ और विटामिन ‘डी’ से युक्त होता है। 

सामग्री :  आधे पके हुए ब्राउन/व्हाइट राइस – 1/2 कप, पानी – 2 कप (500ml|), खजूर – 4, वैनिला एक्सट्रेक्ट (वैकल्पिक) – 1/2 चम्मच (tsp),

नमक – चुटकी भर

विधि: सभी सामग्री को ब्लेंड करके छलनी से छान लें। रेफ्रिजरेटर में रखकर 3 दिनों के अंदर इसका उपयोग करें। 

केश्यू मिल्क (काजू का दुध) 

काजू का दूध बहुत ही पौष्टिक होता है। इसमें मौजूद पोटेशियम की उच्च मात्रा हृदय व पाचन के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होती है। काज के दूध में मौजूद जिंक और आयरन जैसे ट्रेस मिनरल्स (जिनकी कम मात्रा में आवश्यकता होती है) के कई न्यूट्रीशनल फायदे हैं। 

सामग्री: काजू – 1/2 कप, पानी – आवश्यकतानुसार, शहद (वैकल्पिक), सेंधा नमक – चुटकी भर 

विधि :

  • काजू को पानी में कम से कम 1 घंटा या प्रूरी रात भिगोकर रखें।
  • पानी निकालकर भीगे काजू को मिक्सर में डालें।
  • 2 कप पानी डालकर पीस लें।
  • स्वाद के लिए थोड़ा शहद मिलाएं और छाल लें। |
  • उसके बाद ज़रूरत के हिसाब से पानी मिला कर उपयोग करें। 

सोया मिल्क (सोयाबीन का दूध)

सामग्री: सोयाबीन – 1/2 कप, पानी – 3 कप (भिगोने के लिए), पानी- 4 कप (पीसने के लिए)

विधि: 

  • सोयाबीन को ३ कप पानी में रात भर भिगोएं। 
  • सुबह सोयाबीन से पानी निकाल कर उन्हें अच्छी तरह से धोएं। 
  • सोयाबीन के छिलके अलग कर दें। 
  • छिलके रहित सोयाबीन को मिक्सर में डालें। पानी डाल कर एकदम बारीक पीस लें।
  • पिसे मिश्रण को कपड़े से अच्छी तरह दबा कर छान लें। 
  • इस दूध को 20 मिनट के लिए गर्म करें। दूध उबालते समय थोड़ी-थोड़ी देर में चम्मच से चलाते रहें। 
  • इस दूध को ठंडा करने के बाद फ्रिज में रखें और 4 दिन के अंदर इस्तेमाल करें। 

वॉलनट मिल्क (अखरोट का दूध) 

अखरोट में ऐसे एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो कुछ ही खाद्य पदार्थों में पाए जाते हैं। इसमें मौजूद फायटो न्यूट्रिएंट्स शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होने के साथ-साथ सूजनरोधी गुण से भी भरपूर होते हैं। जो कैंसर जैसे रोग से लड़ने में मददगार हैं। अखरोट मैंगनीज, कॉपर, मैग्नीशियम, मोलिब्डेनम व फास्फोरस जैसे मिनरल्स का समृद्ध स्त्रोत है। अखरोट में ओमेगा-3 पोषक तत्व पाए जाते हैं जो हृदय रोग में लाभकारी होते हैं।

सामग्री :  अखरोट – 1 कप, पानी – 3 कप, मेपल सिरप (या शहद) – 2 चम्मच, सेंधा नमक – चुटकी भर 

विधि: 

  • अखरोट को रात भर पानी में भिगोकर रखें।
  • अखरोट को 3 कप पानी के साथ मिक्सर में डालें। 
  • 2 मिनट के लिए पीसें। लगभग 1 मिनट के बाद दूध झागदार हो जाएगा, इसलिए इसे 1 मिनट तक बैठने दें फिर झाग हटा दें। 
  • अब अखरोट के दूध को छान लें और फ्रिज में रखें। इसका पाँच दिनों के अंदर उपयोग करें। 

सारांश

अत: यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि पौधों से प्राप्त दूध न सिर्फ शुद्ध है बल्कि साथ ही सेहत के लिए फायदेमंद तत्वों से भरपूर है। अपनी उच्च गुणवत्ता और लाभकारी गुणों के कारण यह गाय व भैंस से प्राप्त दूध का बेहतर विकल्प हो सकता है।

Leave a Comment

Share via