क्या कोरोना के मरीज को CT Scan जरूरी है? | Does a corona patient need CT scan?

दोस्तों जैसा कि हम जानते हैं देश भर में कोरोना की दूसरी लहर जारी है। भारत में रोजाना 3 लाख से ज्यादा कोरोना के केस देखने को मिल रहें हैं। इन सबमें यह देखने को मिल रहा है कि लोग भय के कारण बिना डॉक्टर की सलाह के सेल्फ प्रिस्क्रिप्शन से CT स्कैन कराने में लगे हैं। इस कोरोना वायरस का  स्ट्रेन (वेरिएंट) ऐसा है जो आसानी से पता नहीं लग रहा है। ऐसे में कई लोग सीटी स्कैन करा रहे हैं। कई लोग बार-बार सीटी स्कैन (CT-Scan) करा रहे हैं, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि कोरोना का पता लगाने के लिए कराई जा रही इस जांच से बेहद मुश्किल भी हो सकती है। डॉक्टरों की राय से आइये समझते हैं कि CT स्कैन है क्या? और क्या इस तरह खुद से CT स्कैन कराना कितना सही है और कितना गलत।

CT स्कैन क्या है? | What is CT Scan?

CT स्कैन या Computed Tomography स्कैन है। औपचारिक रूप से “कंप्यूटेड एक्सियल टोमोग्राफी” (Computed Axial Tomography) स्कैन या CAT स्कैन के नाम से भी जाना जाता है। यह एक चिकित्सा इमेजिंग तकनीक है।

जिसका उपयोग डायग्नोस्टिक ​​उद्देश्यों के लिए शरीर की भीतरी तस्वीरों को प्राप्त करने के लिए रेडियोलॉजी में किया जाता है। जिसका उपयोग एक रेडियोग्राफर या डियोलॉजी टेक्नोलॉजिस्ट करता है। CT स्कैन शरीर के कई अंगों का होता है।

कोरोना में शरीर के किस अंग का CT स्कैन होता है?

कोविड के केस में डॉक्टर HRCT चेस्ट यानी सीने का हाई रिजोल्यूशन कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी स्कैन। इस टेस्ट के जरिए फेफड़ों की एक 3डी यानी त्रिआयामी इमेज बनती है। जो बहुत बारीक डिटेल्स भी बताती है। इससे ये पता चल जाता है कि मरीज के फेफड़े में किसी तरह का कोई इंफेक्शन है या नहीं है? HRCT के जरिए फेफडों की 3डी तस्वीर बन जाती है।

और यदि इंफ़ेक्शन है, तो कितना गहरा है, कहां तक फैला है आदि। इस प्रक्रिया में आपका एक बेंच पर लिटाया जाता है। लिटाने के पहले आपसे कहा जाता है कि धातु का बना सारा सामान या गहना उतार दीजिए। फिर वो बेंच सरककर एक छल्ले की तरह की मशीन में चली जाती है। मशीन शरीर के भीतर की तस्वीरें लेती है। ठीक वैसे ही जैसे एक्स-रे होता है। लेकिन एक्स-रे से ज़्यादा व्यापक और सटीक जानकारी के साथ।

CT स्कैन किन परिस्थितियों में कितना खतरनाक है?

जी हाँ, ऐसा ही है. सीटी स्कैन कराना खतरनाक भी है, क्योंकि बार-बार ये जांच कराने पर आप गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं. इतना ही नहीं, इससे कैंसर तक हो सकता है. देश के सबसे बड़े अस्पताल में से एक एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने इसे लेकर चेतावनी दी है. डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि सीटी स्कैन का मिस यूज़ किया जा रहा है।

डॉ. गुलेरिया कहते हैं कि अगर कोरोना के लक्षण हल्के हैं तो सीटी स्कैन की कोई ज़रूरत नहीं है. इसका कोई फायदा नहीं है. एक सीटी स्कैन कराना 300 एक्स-रे के बराबर माना जाता है. ऐसे में सीटी-स्कैन सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है. इससे कैंसर तक हो सकता है. इसलिए बार-बार सीटी-स्कैन के बारे में न सोचें. अपने चिकित्सक से परामर्श के बाद ही सीटी-स्कैन कराएं.

CT स्कैन कब नहीं कराना चाहिए?

विशेषज्ञों और डॉक्टरों की सलाह के हिसाब आए हमें कब और किन परिस्थितियों में CT स्कैन नहीं करना चाहिए।

  • अगर आपकी कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आई है मगर आपमें कोविड के कोई लक्षण नहीं हैं यानी कि आप ए-सिम्टमैटिक हैं तो आपको सीटी-स्कैन कराने की कोई जरूरत नहीं है।
  • अगर आपमें कोविड के माइल्ड(हल्का) लक्षण हैं, यानी कि आपको सर्दी जुकाम हुआ और हल्का बुखार है, मगर आपको ज्यादा परेशानी नहीं है तब भी आपको सीटी-स्कैन कराने की कोई जरूरत नहीं है।
  • इसके अलावा इसे आरटी-पीसीआर की तरह इस्तेमाल नहीं करना है, यानी कि आपको कोविड हुआ है या नहीं ये पता करने के लिए आपको सीटी-स्कैन नहीं कराना है। 
  • डॉक्टर ने अगर सलाह दी है तब सीटी-स्कैन कराना है।
  • बहुत सारे लोग गलती करते हैं कि कोविड टेस्ट कराते वक्त सीटी-स्कैन भी करा आते हैं, यहां उनसे गलती हो जाती है, क्योंकि शुरुआती दौर में कोरोना वायरस आपके फेफड़े तक तो पहुंचा ही नहीं होता है, उस वक्त वायरस नाक और गले के एरिये में होता है। शुरू में सीटी-स्कैन नॉर्मल आ सकता है मगर बाद में सीवियर कोविड हो सकता है और फेफड़े तक वायरस पहुंच जाता है इसलिए चौथे से छठे दिन के बीच सीटी-स्कैन कराना बेहतर होता है, हालांकि डॉक्टर की सलाह के बाद ही सीटी-स्कैन कराएं।
  • अगर आपको 4 दिन बाद काफी ज्यादा वीकनेस है, खांसी आ रही है, चेस्ट में बहुत ज्यादा पेन है और सांस लेने की तकलीफ है तब आप सीटी-स्कैन कराएं।

किन परिस्थितियों में जरूरी है सीटी-स्कैन कराना?

सीटी-चेस्ट कराने से फेफड़े में इंफेक्शन का सही पता लगता है, क्योंकि आरटी-पीसीआर में कोविड की गंभीरता का पता नहीं चलता है। जिस तरह सीटी-स्कैन बेवजह कराना गलत है। उसी तरह नहीं कराना भी गलत है। इएलिये अगर आपको दिक्कत ज्यादा है तो डॉक्टर की सलाह से ही CT स्कैन कराएं। तब सीटी-स्कैन कराने से आपको पता चल जाएगा कि इंफेक्शन कितनी तेजी से फेफड़ों में फैल रहा है और लंग्स का इंवॉल्वमेंट कितना है, और उसी हिसाब से आपका इलाज भी शुरू होगा। इसके बाद ही पता चलता है कि स्टेरॉयड देना है या फिर ऑक्सीजन देना है। वरना आपका ऑक्सीजन लेवल गिर सकता है और आप गंभीर बीमार हो सकते हैं, ऐसे में पहले ही गंभीरता पता करके इलाज शुरू किया जा सकता है।

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