किसी प्रोडक्ट का न्यूट्रीशन लेबल कैसे पढ़ें? | How to read the nutrition label of a product?

How to read the nutrition label of a product?
How to read the nutrition label of a product?

हम सब जानते हैं कि स्वस्थ रहने के लिए उचित व पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्वों का नियमित सेवन बहुत जरूरी है लेकिन हमारे आहार में कई न्यूट्रिएंट्स की कमी रह जाती है। इनकी पूर्ति के लिए बाजार में विभिन्न न्यूट्रीशन सप्लीमेंट्स उपलब्ध है जे हम लगभग रोज उपयोग में लाते है। लेकिन क्या आप जानते है कि ये सप्लीमेंट्स हमें कौन से व कितनी मात्रा में पोषक तत्व प्रदान कर रहे हैं? अधिकतर लोग इस बात से अनभिज्ञ है कि किसी प्रोडक्ट के डिब्बे या पैक पर उसमें शामिल न्यूट्रिएंट्स के बारे में जो जानकारी दी जाती है उसका मतलब क्या है। हर खाने-पीने के प्रोडक्ट व हर हेल्थ सप्लीमेंट के पैक या डिब्बे पर दी जाने वाली यह जानकारी न्यूट्रीशन लेबल या न्यूट्रीशन इन्फॉर्मेशन कहलाती है और उस प्रोडक्ट या सप्लीमेंट के इंग्रेडिएंट्स (उसमें डाली गई सामग्री) के बारे में संपूर्ण जानकारी प्रदान करती है। यह बहुत जरूरी है कि हम इस न्यूट्रीशन लेबल को ध्यान से पढ़ें।

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उदहारण के माधयम से नूट्रीशन लेबल को समझें | Understand nutrition label with an example

आइए हम ऐसे ही किसी प्रॉडक्ट या सप्लीमेंट के न्यूट्रीशन लेबल को देखें। नीचे दिए गए लेवल पर सबसे पहले 28 ग्राम मात्रा की सर्विंग साइज दी गयी है यानि आपको एक बार में उस प्रोडक्ट या सप्लीमेंट की 28 ग्रा मात्रा लेनी है। लेवल में दर्शायी गई कैलारीज व हर प्रकार के पोषक तत्वें की मात्रा भी उस प्रोडक्ट या सप्लीमेंट की एक सर्विंग के अनुसार दी जाती है। उदाहरण के तौर पर, नीचे दिखाए गए लेबल के प्रोडक्ट की 28 ग्राम मात्रा (1 सर्विंग) लेन से हमें 110 कैलारीज मिलेंगी व 4 ग्राम कुल फैट (10 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल सहित), 18 ग्राम कार्बोहाइड्रेट (11 ग्राम शक्कर सहित) और 1 ग्राम प्रोटीन मिलेगा। 

Nutrition Facts
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कई बार किसी सप्लीमेंट का सर्विंग साइज 3 टेबलेट्स का होता है और बहुत से लोग यह समझते हैं कि उस सप्लीमेंट के लेबल में दर्शाए गए पोषक तत्व उसकी प्रत्येक टैबलेट में उपलब्ध हैं जबकि वास्तविकता में दर्शाई गई पोषक तत्वों की वह मात्रा उसकी 3 टेबलेट्स में है। इसलिए कई सप्लीमेंट्स जिन्हें हम अच्छा समझ रहे होते हैं, दरअसल उनमें काफी कम मात्रा में पोषक तत्व होते हैं। इसी कारण से हम उनकी कीमत को भी ठीक से समझ नहीं पाते। लेबल में यह जानकारी भी होती है कि उक्त प्रोडक्ट या सप्लीमेंट की एक सर्विंग से मिले हर पोषक तत्व की मात्रा उस पोषक तत्व के आरडीए (RDA) यानि उसकी निर्धारित दैनिक आवश्यकता की कितनी प्रतिशत की पूर्ति करती है। दिखाए गए लेबल के प्रोडक्ट से हमें जे 1 ग्राम फाइबर मिल रहा है वो हमारी फाइबर की दैनिक आवश्यकता की सिर्फ 3 प्रतिशत की पूर्ति करेगा। न्यूट्रीशन लेबल ‘इन्ग्रेडिएन्ट्स’ शीर्षक से एक और अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी देता है। इसमें यह बताया जाता है कि उस प्रोडक्ट या सप्लीमेंट में क्या क्या सामग्री डाली गई है। फूड डिपार्टमेंट के नियम के अनुसार जो इंग्रेडिएंट्स उस प्रोडक्ट में सबसे ज़्यादा मात्रा में होता है, उसे सबसे पहले लिखा जाता है। यदि किसी प्रोडक्ट की इंग्रेडिएंट्स लिस्ट में शुगर सबसे पहले लिखी गई है तो इसका मतलब है कि उस प्रॉडक्ट में शुगर की मात्रा सबसे अधिक है। जिस प्रोडक्ट का उदाहरण हमने आपको दिखाया है उसकी इग्रेंडिएंट लिस्ट में सबसे पहले व्हीट फ्लोर यानि गेहूँ का आटा लिखा गया है। इसके बाद अगला इग्रेंडिएंट अनसाल्टेड बटर है। यानि उस प्रोडक्ट में सबसे अधिक मात्रा गेहूं के आटे की है व उसके बाद सबसे अधिक मात्रा नमक रहित मक्खन की है। चूंकि इस लिस्ट में प्रोटीन का कोई विशिष्ट स्रोत नहीं दिखाया गया है तो इसका अर्थ है कि लेबल में दिखाई गई प्रोटीन की मात्रा दरअसल गेहूँ के आटे से मिलने वाले निम्न गुणवत्ता के प्रोटीन को गिनकर बताई गई है और यदि यह गेहूं का आटा आप पूर्णता: पचा सकेंगे तो ही आपको यह प्रेटीन मिल सकेगा अन्यथा नहीं। 

कैसे पहचाने उच्च गुणवत्ता वाले नूट्रीशन सप्लीमेंट? | How to Identify High Quality Nutrition Supplements?

उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन सप्लीमेंट्स के न्यूट्रीशन लेबल पर आइसोलेटेड प्रोटीन की वास्तविक मात्रा व इसका स्रोत लिखा होता है। कई अन्य निर्माता गेहूं का आटा या दूध का पाउडर डाल कर सप्लीमेंट में प्रोटीन का होना दर्शाते देते हैं। गुणवत्ता व लाभ के मामले में गेहूं का आटा या दूध का पाउडर आइसोलेटेड प्रोटीन के बराबर कभी लाभदायक नहीं हो सकते। सस्ते दिखने वाले ऐसे प्रोडक्ट निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री से बने होने के कारण दरअसल बहुत महंगे पड़ते हैं। ज़रा सोचिए कोई माँ अपने बच्चे को प्रोटीन देने के लिए गेहूं के आटे को दूध में मिलाकर क्यों पिलाना चाहेगी। इसलिए किसी भी प्रॉडक्ट के लेबल में यह देखना बहुत जरूरी है कि उसमें बताया गया कोई भी इंग्रेडिएंट्स उसके कंटेंट (सामग्री) में शुद्ध रूप में है या फिर वह उसमें डाली गई किसी अन्य सस्ती सामग्री का बायप्रोडक्ट है। फूड सेफ्टी की ओर बढ़ती जागरूकता को ध्यान में रखते हुए ग्लाईसीमिक इंडेक्स नामक एक और महत्वपूर्ण जानकारी को हर फूड प्रोडक्ट व सप्लीमेंट के न्यूट्रीशन लेबल में शामिल किया जाना चाहिए। ग्लाईसीमिक इंडेक्स यह इशारा करता है कि उक्त फूड प्रॉडकट को लेन से हमाय ब्लड-शुगर कितनी तेज़ी से बढ़ेगा। अत: डायबिटिक लोगों को ज़्यादा ग्लाईसीमिक इंडेक्स वाले फूड प्रॉडक्ट्स व सप्लीमेंट्स से परहेज करना चाहिए क्योंकि इन्हें लेने से उनका ब्लड-शुगर तेज़ी से बढ़ सकता है। 

किसी प्रोडक्ट का न्यूट्रीशन लेबल पढ़ने के बाद उसी कैटेगरी के अन्य ब्रांड के प्रॉडक्ट के लेबल से उसकी तुलना करें। दोनों लेबल्स में उल्लेखित सर्विंग साइज, इंग्रेडिएंट्स, स्रोत, प्रोटीन का प्रकार, मात्रा व कैलोरी की तुलना करें। उसके बाद ही कीमत की तुलना करें। सस्ते लेकिन निम्न गुणवत्ता प्रॉडक्ट्स न खरीदें क्योंकि वे कोई भी स्वास्थ्य लाभ प्रदान नहीं करते। हमेशा प्रतिष्ठित कंपनी गुणवत्ता वाले, प्रमाणित, क्लिनिकली प्रूवन ब्रांड ही लें क्योंकि ये प्रोडक्ट्स ही आपकी एक स्वस्थ व खुशहाल जिंदगी जीने में मदद करेंगे।

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