क्षारीय पानी

क्षारीय पानी

शरीर को क्षारीय बनाने के लिये आवश्यक

पीने के पानी की पीएच वेल्यू का महत्व

ऐल्कलाइन डाइट के अध्ययन से हमने जाना कि शरीर के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए भर के हर हिस्से में ऐल्कलिनिटी व एसिडिटी के संतुलन की ज़रूरत होती है। अशुद्धियों से मुक्त होने के अलावा पानी की गुणवत्ता पानी के पीएच द्वारा निर्धारित होती है। भारतीय मानकों के अनुसार  पीने के पानी का पीएच 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए। 7 पीएच वाला पानी न्यूट्रल होता है। पानी 30% अम्लीय व 70% क्षारीय होता है। अगर पानी से उसका अम्लीय भाग हटा दिया जाए तो बचे हुए पानी का पीएच 9.5 (ऐल्कलाइन) हो जाता है जो पीने के लिए सबसे उपयुक्त  पानी होता है। चूंकि हम रोज़ लगभग 8-10 ग्लास पानी पीते हैं, इसलिए यह पानी हमारे शरीर को ऐल्कलाइन बनाने में मददगार होता है।  

पीने के पानी के असामान्य पीएच के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

वैज्ञानिकों के अनुसार पीने के पानी के पीएच का हमारी आंतों के मित्र फ्लोरा पर गहरा असर पड़ता है। इसलिए एसिडिक पानी का दुष्प्रभाव हमारी डायजेस्टिव हेल्थ व इम्यूनिटी पर पड़ता है। एसिडिक पानी के सेवन से टाईप-1 डायबिटीज़ रोग का खतरा बढ़ता है। पीने के पानी या पेय में उपस्थित एसिडिक तत्व हमारे पाचन तंत्र, खासकर, फूड पाइप की झिल्ल्यिों को सीधी क्षति पहुंचाते हैं। इसलिए प्यास बुझाने के लिए हर समय सोडा वॉटर या कोल्ड-ड्रिंक्स पीना हानिकारक हो सकता है क्योंकि आमतौर पर यह काफी एसिडिक होते हैं। एसिडिक पानी या पेय पदार्थ पीने से हमारे दांतों की बाहरी परत यानि इनेमल क्षतिग्रस्त हो सकता है जिससे दांत सडने की संभावना बढ़ती है। वातावरण से कार्बन डायआक्साइड को सोख लेने से जल एसिडिक हो जाता है। बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण एसिडिक वर्षा की समस्या बढ़ रही है और हमारे जल स्रोत एसिडिक हो रहे हैं। एसिडिक पानी प्रदूषित मिट्टी व घरों में लगे धातु के पाइपों से लेड (सीसा), जस्ता व तांबे जैसी धातुएं -अपने में खींच लेता है जिनकी अधिकता हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होती है। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार लगातार एसिडिक पानी पीने से कई धीमे पनपने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

ऐल्कलाइन (क्षारीय) पानी के फायदे  

ऐल्कलाइन (क्षारीय) पानी स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में कई तरह से उपयोगी है। चूंकि ऐल्कलाइन पानी का पीएच नल के सादे पानी से ज़्यादा होता है, अत: यह रक्त व यूरीन में एसिड-धार संतुलन (पीएच) को सुधारने, शरीर में पानी की मात्रा जल्द बढ़ाकर डीहाइड्रेशन से घटी हुई शारीरिक कार्यक्षमता व रक्त के गाढ़ेपन को सामान्य करने में सादे पानी से बेहतर सिद्ध हुआ है। इसके अलावा मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा देने, आंतों के मददगार फ्लोरा को बचाकर बदहज़मी व आयबीएस जैसे पेट के रोग में, पेट दर्द व डायरिया से आराम देने व शरीर द्वारा पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण में ऐल्कलाइन पानी लाभदायक पाया गया है। हानिकारक फ्री रेडिकल्स के द्वारा कोशिकाओं को होने वाली हानि की रोक-थाम से बढ़ती उम्र के असर को धीमा करने व पेन्क्रियाज़ की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं की रक्षा कर के डायबिटीज व अन्य कई बीमारियों से बवाव में भी ऐल्कलाइन पानी मदद कर सकता है। इसके अलावा वज़न घटाने और शारीरिक ऊर्जा, मानसिक क्षमता व हड्डियों की मजबूती बढ़ाजे (यानि हड्डियों के खोखलेपन या ऑस्टियोपोरोसिस रोग से बचाव) में भी ऐल्कलाइज पानी लाभदायक हो सकता है। ‘शंघाई जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन’ 2001 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, कुछ महीने तक ऐल्कलाइन पानी पीने वाले लोगों के रक्त में कॉलेस्ट्रॉल, रक्त शर्करा व ब्लडप्रेशर में कमी देखी गई। एनल्स ऑफ ओटोलॉजी, राइनोलॉजी एवं लैरिंगोलॉजी नामक जरनल (जुलाई 2002) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, 8.8 पीएच वाले पानी को पीने से पेट का एसिड वपेप्सिन निष्क्रिय हो जाते हैं जो एसिड रिफ्लक्स (एसिडिटी के कारण सीने में जलन) का एक प्रभावी उपचार हो सकता है। कुछ अन्य अध्ययनों के अनुसार, मिनरल की अधिक मात्रा से युक्त ऐल्कलाइन पानी पीते रहने से हृदय-रोग, रक्त-संवार से जुड़े रोगों और कैंसर से ग्रसित होने व असमय मृत्यु की संभावना घटती है।

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